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बाइडेन ने इसरायली घोषणा की निंदा की

By Staff
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बाइडेन ने इसरायली घोषणा की निंदा की

मध्य पूर्व की यात्रा पर यरुशलम पहुंचे अमरीकी उपराष्ट्रपति जो बाइडेन ने पूर्वी यरुशलम में यहूदियों के लिए 1600 घर बनाने की इसरायल की योजना की कड़ी निंदा की है.

बाइडेन ने एक बयान जारी कर कहा कि इसरायल की यह घोषणा और इसका समय शांति वार्ताओं के लिए ज़रुरी माहौल के महत्व को नकारती है.

उनका कहना था, ‘’ मैं पूर्वी यरुशलम में और घर बनाने के इसरायली सरकार के फ़ैसले की कड़ी भर्त्सना करता हूं.’’

बाइडेन का कहना था कि इसरायली और फलस्तीनियों को बातचीत के लिए बेहतर माहौल बनाने की ज़रुरत है न कि इसे और पेचीदा करने की. उन्होंने कहा, ‘’ संघर्ष से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए वार्ता और वार्ता के लिए जिस माहौल की दरकार है, यह घोषणा उस माहौल के महत्व को ख़त्म करती है.’’

उन्होंने कहा कि अमरीका मानता है कि यरुशलम इसरायली, फ़लस्तीनियों, यहूदियों,मुस्लिमों और ईसाईयों के लिए महत्वपूर्ण स्थान है.

उनका कहना था, ‘’हमारा मानना है कि अच्छी भावना से वार्ताएं करने पर दोनों पक्ष एक ऐसे मुकाम पर पहुंच सकते हैं जिससे यरुशलम के मुद्दे पर दोनों पक्षों की आशाएं पूरी हों और दुनिया के लोगों की भी.’’

उपराष्ट्रपति ने पूर्व में कहा था कि इसरायल और फ़लस्तीनीयों के अप्रत्यक्ष बातचीत के लिए तैयार होने से शांति बनाए रखने का अच्छा मौका बन रहा है.

इसरायल की 1600 नए घर बनाने की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए फ़लस्तीनी प्राधिकरण के प्रवक्ता नबील अबू रुदैना का कहना था कि यह इसरायलियों की इस मान्यता को दर्शाता है कि शांति के लिए अमरीका के प्रयास शुरु होने से पहले ही विफल रहे है.

रुदैना ने कहा, ‘’यह एक ख़तरनाक फै़सला है और इसका प्रभाव वार्ताओं पर भी पड़ेगा.’’

उधर इसरायल के गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता का कहना था, ‘’ यह एक लंबी प्रक्रिया है जो बहुत दिनों से चल रही है. यह घोषणा मात्र इस प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की यात्रा से कोई संबंध नहीं है.’’

अमरीकी दबाव में इसरायल ने पश्चिमी तट यानी वेस्ट बैंक में नई इमारतें बनाने के काम पर दस महीनों की रोक लगाई थी लेकिन इस रोक में पूर्वी यरुशलम शामिल नहीं है.

उल्लेखनीय है कि फ़लस्तीनी पूर्वी यरुशलम को अपनी राजधानी बनाना चाहते हैं.

इसरायल ने 1967 की लड़ाई के दौरान पूर्वी यरुशलम पर कब्ज़ा कर लिया था लेकिन अभी तक किसी देश ने इसे इसरायल के हिस्से के तौर पर मान्यता नहीं दी है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय पूर्वी यरुशलम को कब्ज़े वाला इलाक़ा मानता है.

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