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मुशर्रफ़ हैं 'वांटेड', तालिबान आज़ाद

By Jaya Nigam
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मुशर्रफ़ हैं 'वांटेड', तालिबान आज़ाद

हारून रशीद

बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद

पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी एफ़आईए की ओर से तैयार की गई 119 वांटेड लोगों की सूची में बेनज़ीर भुट्टो, पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ और मैरियट होटल पर हमलों में शामिल संदिग्ध लोगों के नाम है लेकिन इस सूची में तालेबान के बड़े नेताओं का नाम मौजूद नहीं है.

राज्य पुलिस के ख़ुफ़िया अधिकारियों की मदद से तैयार की गई यह सूची उतनी विस्तृत और व्यापक नहीं है लेकिन इसमें कथित चरमपंथियों के बारे में ज्ञान का भंडार है.

बीबीसी को मिलने वाली यह सूची पिछले साल अक्तूबर में तैयार की गई थी.

‘रेड बुक’ कहलाने वाली इस किताब में एफ़आईए के अपने, पाकिस्तान के चारों प्रांतों, और संघीय राजधानी की पुलिस के सबसे ज़्यादा ख़तरनाक और वांटेड लोगों का विवरण है

इस सूची में मुंबई हमलों के हवाले से 11 लोगों का नाम तो शामिल है लेकिन हैरानी की बात है कि उनकी गिरफ़्तारी पर पुरस्कार की रक़म का कोई ज़िक्र नहीं है.

इसी प्रकार स्वात और कबायली इलाक़े के बड़े नेताओं का भी ज़िक्र नहीं है.

सूची में शामिल ज़्यादातर लोगों का संबंध प्रतिबंधित संगठन लश्करे-झंगवी से बताया गया है.

एफ़आईए के नए स्थापित किए गए जांच ग्रुप एसआईजी की इस सूची की एक महत्वपूर्ण बात क़बायली इलाक़ों के चरमपंथियों के नामों का न होना है.

चारों प्रांतों और इस्लामाबाद का तो ज़िक्र है लेकिन प्रतिबंधित तालेबान आंदोलन के नेताओं का कोई अता-पता नहीं है.

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सबसे अधिक 25 लोग वांटेड हैं, जबकि दूसरे नंबर पर सिंध प्रांत के 24 और बलूचिस्तान के 18 हैं.

लेकिन सबसे हैरत की बात है कि सूबा सरहद में सबसे कम सिर्फ़ 16 लोग वांटेड है हालांकि यह सूबा चरमपंथ से सबसे ज़्यादा प्रभावित है.

सूची में सबसे पहला नाम अटक के इबादुर्रहमान का है. उनका नाम अकोड़ा ख़टक में स्थित दारुल हक़्क़ानिया के नादिर ख़ान उर्फ़ इस्माईल के ज़रिए स्थापित गुट से संबंधित बताया जाता है.

‘रेड बुक’ के अनुसार उन्होंने बैतुल्लाह महसूद के आदेश पर बेनज़ीर भुट्टो पर हमला किया था. वो कथित तौर पर ख़ैबर एजेंसी में एक प्रशिक्षण कैप चालाया करते थे.

इसी प्रकार मैरियट होटल में संदिग्ध 36 वर्षीय व्यक्ति राणा अशफ़ाक़ अहमद के बारे में लिखा है कि उन्हें कंधे में गोली लगी थी और वह वज़ीरिस्तान में स्थापित क़ारी सैफ़ुल्लाह गुट से संबंधित है. उनका संबंध हिज़बे-जिहाद नामक इस्लामी संगठन से बताया जाता है जिससे वह 1997 से प्रत्येक महीने वेतन भी लेते थे.

उन पर आरोप है कि उन्होंने मैरियट हमले में इस्तेमाल होने वाले आत्मघाती ज़ाकिरुल्लाह को पेशावर में हमले से पहले अपने पास रखा था. वह सिपाहे-सहाबा के पूर्व अध्यक्ष मौलाना आज़म फ़ारूक़ी के भाई मौलाना आलम तारिक़ के ड्राइवर भी रह चुके हैं.

हर वांटेड व्यक्ति की तस्वीर (अगर मिली हो), त्वचा का रंग, क़द काठी, और किन अपराध में वांटेड हैं जैसी जानकारी इस सूची में दर्ज है.

कुछ लोगों के बारे में तो काफ़ी हास्यास्पद मालूमात भी दर्ज हैं जैसे ‘शहरी हुलिया’, ‘बॉडी बिल्डर की तरह’, या फिर ‘तबलीग़ी की तरह चलना’, ‘रुक रुक कर’, ‘तेज़ चलना’ वग़ैरह.

कुछ लोगों की दाढ़ी के बारे में लिखा है कि ‘सुन्नत के मुताबिक़’, ‘शिया प्रकार की’, ‘क़ानूनी स्तर की’, या फिर ‘जमाती स्टाइल’ की.

कुछ लोगों की ज़बान के बारे में काफ़ी दिलचस्प बातें भी लिखी गई है. एक के बोलने के अंदाज़ के बारे में लिखा है, ‘बिहारी लह्जा’, एक अन्य व्यक्ति के बारे में है कि ‘वह ग़ैर-संजीदा बात करता है’.

कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक़ तेज़ी से बदलती परिस्थिति में ऐसी किताबों में दर्ज मालूमात बदलती रहती हैं. कुछ पत्रकारों का कहना है कि उसमें दर्ज मालूमात कम से कम हैं और उनके पास उन वांटेड लोगों के बारे में अधिक मालूमात मौजूद नहीं है.

किताब में दर्ज एक और कथित चरमपंथी क़ारी ज़फ़र के बारे में तालेबान की ओर से प्रमाणित किया गया है कि वह ड्रोन हमले में मर चुके हैं.

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