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पूर्व उच्चायुक्त का परिवार दिल्ली में 'बंद'

By Jaya Nigam
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पूर्व उच्चायुक्त का परिवार दिल्ली में 'बंद'

भारत में रवांडा के पूर्व उच्चायुक्त लेफ़्टिनेन्ट जनरल कायुम्बा नयाम्वासा की पत्नी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में ही प्राइवेट सुरक्षा गार्डों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें और उनके बच्चों को उनके आधिकारिक निवास में बंद कर दिया गया है.

पूर्व उच्चायुक्त लेफ़्टिनेन्ट जनरल नयाम्वासा की पत्नी रॉजेट दक्षिणी दिल्ली के डीएलएफ़ छत्तरपुर इलाक़े में एक फ़ार्म हाउस में रहती हैं.

रवांडा के विदेश मंत्रालय ने 26 फ़रवरी 2010 को एक पत्र के ज़रिए भारतीय विदेश मंत्रालय को सूचित किया था कि लेफ़्टिनेन्ट जनरल नयाम्वासा अब भारत में रवांडा के उच्चायुक्त नहीं हैं. ये भी सूचित किया गया कि उच्चायोग में फ़र्सट काउंसिलर नगोगा यूजीन को फ़िलहाल उच्चायुक्त का कार्यभार सौंपा गया है.

ख़बरों के अनुसार पद से हटाए जाने से पहले रवांडा की जाँच एजेंसियों ने ‘गंभीर आपराधिक आरोपों’ के बारे में लेफ़्टिनेन्ट जनरल नयाम्वासा से पूछताछ की थी.

बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद के साथ फ़ोन पर बातचीत के दौरान रॉजेट ने कहा, "इस समय मुझे नहीं पता कि वे कहाँ हैं. मैने सुना है कि वे दक्षिण अफ़्रीका में हो सकते हैं."

अपनी स्थिति के बारे में पूर्व उच्चायुक्त की पत्नी रॉजेट ने बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद को बताया, "हम घर में बंद हैं. बच्चों को स्कूल नहीं जाने दिया गया है और अन्य लोग घर के अंदर नहीं आ सकते हैं....मेरा अनुमान है कि उनके (रवांडा की सरकार) के आदेशों पर हो रहा है."

उनका कहना था कि स्थिति यह है कि मंगलवार सुबह जब वे बाहर जाने लगीं तो गेट पर ताला लगा हुआ था और उन्हें बताया गया कि चाबी दफ़्तर में है.

एक सवाल के जवाब में उनका कहना था, "मामला जो भी हो, बच्चों को इससे अलग रखना चाहिए. उन्हें स्कूल जाने देना चाहिए..."

भारत सरकार के रुख़ के बारे में रॉजेट का कहना था, "मैं भारत सरकार के संपर्क में हूँ. भारतीय विदेश मंत्रालय के डायरेक्टर प्रोटोकॉल का फ़ोन आया था और उन्होंने कहा कि वे मामले में पूछताछ कर रहे हैं.....मैं उनके जवाब का इंतज़ार कर रही हूँ."

उनका कहना था कि भारत सरकार ने वादा किया है कि उन्हें इस स्थिति से मुक्ति दिलाएगी.

बीबीसी ने जब भारतीय विदेश मंत्रालय के चीफ़ ऑफ़ प्रोटोकॉल सुनील लाल से फ़ोन पर बात की तो उनका कहना था कि उन्हें मीडिया से बात करने की इजाज़त नहीं है.

एक अन्य पत्र के ज़रिए 28 फ़रवरी रवांडा के विदेश मंत्रालय ने दिल्ली स्थित हैटफ़ील्ड इन्वेस्टिगेशन सर्विसेज़ (प्राइवेट) लिमेटि़ड को आदेश दिया था कि रवांडा की सरकार की चिंता के कारण, उक्त फ़ार्म हाउस में किसी को भी रात नौ बजे के बाद अंदर न जाने दिया जाए और जो बाहर के लोग अंदर गए हों उन्हें रात 9.30 बजे तक बाहर जाने को कह दिया जाए.

दिलचस्प है कि नगोगा यूजीन के हस्ताक्षर वाले इसी पत्र में हाथ से लिखा है कि ये आदेश घर में रहने वाले लोगों पर लागू नहीं होता जो रात दस बजे तक घर के अंदर-बाहर आ और जा सकते हैं.

नगोगा यूजीन ने बीबीसी संवाददाता अतुल संगर के साथ फ़ोन पर बातचीत में कहा, "ये सही नहीं है. रवांडा उच्चायोग के आदेश ये हैं कि उन्हें इजाज़त है कि वे अंदर और बाहर आ और जा सकते हैं और वे अंदर-बाहर आते जाते भी रहे हैं. यदि उनके पास कोई सबूत हैं तो वे आपको दिखा सकते हैं....लेकिन ये सही नहीं है."

उनका कहना था, "उन्हें कोई ख़तरा नहीं है...ये तो अच्छा है कि उन्हें सुरक्षा दी गई है.... जहाँ सुरक्षा तैनात होगी तो गार्ड गेट पर आने-जाने की हिदायत तो देंगे ही और सुरक्षा प्रदान करेंगे ही...ये बेबुनियाद ग़लत आरोप हैं."

जब बीबीसी के पवन नारा ने छत्तरपुर स्थित फ़ार्म हाऊस पर जाकर रॉजेट से मिलने का प्रयास किया तो गेट पर मौजूद एक भारतीय पहरेदार ने कहा कि 'अंदर निजी सुरक्षा का पहरा है और किसी को अंदर जाने की इजाज़त नहीं है.'

पहरेदार का कहना था कि गेट की चाबी अंदर मौजूद सुरक्षा गार्डों के पास है.

रॉज़ेट के साथ फ़ोन पर बात की गई तो वे गेट तक आईं लेकिन सुरक्षा गार्डों के एतराज़ पर वे वापस चली गईं.

इसके बाद एक सिख सुरक्षा गार्ड ने अपनी पहचान बताए बिना कहा पवन नारा से कहा कि यदि वे रवांडा हाई कमिशन से लिखित अनुमति ले आए तो वे रॉजेट से मिल सकते हैं.

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