आर्थिक समीक्षा : कृषि की चुनौतियों के लिए व्यापक प्रयासों की आवश्यकता
समीक्षा में कहा गया कि कृषि उत्पादन और उत्पादकता में सुधार, कृषि निवेशों के बेहतर उपयोग, उपयुक्त विपणन, बुनियादी ढांचे तथा सहयोग और पर्यावरणीय चिंताओं पर यथोचित जोर देना जरूरी है। इसके साथ ही कृषि में निवेश को बढ़ाने और सक्षम खाद्य प्रबंधन पर नए सिरे से ध्यान देने की आवश्यकता है।
समीक्षा में कहा गया कि केंद्र तथा राज्य सरकारों के सहयोग से देश सबसे बड़े सूखे का सामना करने में समर्थ हुआ। केंद्र तथा राज्य सरकारों ने किसानों को कई प्रोत्साहन और रियायतें दी जिससे खरीफ उत्पादन में नुकसान को कम किया जा सका और रबी में उत्पादन को बढ़ाया जा सका। खरीफ में हुए नुकसान की पूर्ति रबी की फसलों में कर ली जाएगी। इसके बावजूद कृषि क्षेत्र में कई चुनौतियां हैं जिनका समाधान किया जाना आवश्यक है।
समीक्षा के अनुसार यद्यपि प्रति हेक्टेयर उत्पादन में सुधार हुआ है लेकिन यह बढ़ती जनसंख्या, खासकर जब आय स्तर भी बढ़ रहा है, की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं है। कृषि उत्पादन में वांछनीय वृद्धि नहीं हो रही है इसलिए अनुसंधान और बेहतर कृषि प्रक्रियाओं पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि कम समय में उत्पादन को बढ़ाया जा सके।
दालों तथा तिलहनों के कम उत्पादन पर चिंता जताते हुए कहा गया कि देश की आवश्यकता का काफी बड़ा हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है। दाल उत्पादक देशों की संख्या सीमित होने के कारण उनके आयात की संभावना भी सीमित है। इसके कारण इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है।
समीक्षा में कृषि उत्पादन पर जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए फसलों की सूखा रोधी और उच्च उत्पादकता वाली किस्मों के विकास पर जोर दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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