शशि थरूर की नई नृत्यकला : 'नृत्य कूटनीति'
थरूर ने गुरुवार की शाम राजधानी के गणेश नाट्यालय में भरतनाट्यम का अयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, "मैं राजनयिकों को अपनी मूल्यवान सांस्कृतिक विरासत का अहसास कराना चाहता हूं। कूटनीति भले ही अनुमानित तरीकों पर की जाती हो, लेकिन मैं इस ढांचे को तोड़ना चाहता हूं और कुछ अलग करने की कोशिश करना चाहता हूं।"
थरूर ने कहा, "पहली बार मैं राजदूतों को भारतीय संस्कृति से परिचय करा रहा हूं। मैं आशा करता हूं कि यह एक टिकाऊ प्रक्रिया बनेगी।"
भरतनाट्यम नृत्यांगना नेहा भटनागर का शिवाष्टकम नृत्य मिस्र के राजदूत को उस प्राचीन युग की ओर ले गया, जब सुंदर भारतीय नारियां हस्तनिर्मित सिल्क की साड़ियां पहने आकर्षक दक्षिण भारतीय मंदिरों के परिसरों में नृत्य किया करती थीं।
विदेशी राजदूतों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान राजदूत मोहम्मद अब्देल हामिद हिगाजी ने कहा कि यह एक प्राचीन संस्कृति का नमूना है।
ज्ञात हो कि भरतनाट्यम, भावनात्मक प्रस्तुति (भ), राग (र) और ताल (त) का एक समन्वित रूप है, जो संगम युग के दौरान लगभग 500 ईसा पूर्व दक्षिण भारतीय मंदिरों में 'देवदासी' प्रथा के रूप में अस्तित्व में आया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications