पार्टी में एकता और अनुशासन लाना होगा : आडवाणी (लीड-1)

उन्होंने पार्टी के भीतर एकता और अनुशासन फिर से लाने का आान करते हुए कहा, "एक समय था जब एकता और अनुशासन हमारी पार्टी की प्रमुख शक्ति मानी जाती थी। हमें इस परंपरागत शक्ति को फिर से पाना होगा।"

आडवाणी ने अध्यक्ष नितिन गडकरी के नेतृत्व को पार्टी के लिए एक नए और सकारात्मक दौर की शुरुआत बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत 1942 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की सदस्यता के साथ की थी जो अब भी जारी है और आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि गडकरी का यह कहना सही है कि निजी महत्वाकांक्षओं का स्थान सदैव पार्टी के लक्ष्य और निर्णयों के बाद होना चाहिए।

पिछले वर्ष हुए संसदीय चुनाव में भाजपा की हार के बाद पार्टी के पहले राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए आडवाणी ने कहा कि जनादेश न पाने की निराशा स्वाभाविक है, लेकिन हमने पराजय को एक परिपक्त पार्टी के रूप में स्वीकार किया है।

उन्होंने कहा कि इस हार से सबक सिखते हुए हम आगे बढ़ेंगे। हार और जीत लोकतंत्र को दो पहलू हैं। इससे हमें सुधारात्मक कदम उठाते हुए आगे बढ़ना होगा।

आडवाणी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि नितिन गडकरी के युवा नेतृत्व में पार्टी के जीवन में एक नए और सकारात्मक दौर की शुरुआत हुई है।

उन्होंने कहा कि पार्टी में एकता और सद्भाव के निर्माण के लिए तीन और चीजों पर ध्यान देना होगा, जिससे कि अगले संसदीय चुनाव में भाजपा एक गंभीर दावेदार के रूप में उभर सके।

उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने भौगोलिक और सामाजिक आधार को बढ़ाने के साथ गठबंधन के निर्माण और प्रबंधन की क्षमता को विकसित करना होगा।

आडवाणी ने कहा कि तीसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पार्टी के बारे में लोगों को लगना चाहिए कि वह सुशासन, स्वच्छ राजनीति और विकास के मामले में कांग्रेस से कहीं बेहतर है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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