पतियों से अधिक धनी हैं न्यायाधीशों की पत्नियां (लीड-2)
मुख्य न्यायाधीश अजित प्रकाश शाह और उनकी पत्नी के नाम संयुक्त रूप से मुंबई के पॉश इलाके में एक फ्लैट है और इसके अलावा उन्होंने पत्नी के नाम 50 लाख से अधिक का निवेश कर रखा है।
न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन की पत्नी के नाम चार संपत्तियां हैं। इसमें डीएलएफ गुड़गांव की एक संपत्ति भी शामिल है। इसके अलावा 22 ब्लू चिप कंपनियों में दोनों के नाम संयुक्त रूप से शेयर हैं और दोनों के नाम म्युचुअल फंड की 11 कंपनियों में निवेश है।
न्यायमूर्ति ए.के.सीकरी की पत्नी के नाम गुड़गांव में एक हाउसिंग सोसायटी में 1,850 वर्ग फुट की संपत्ति है। इसके अलावा शेयर और एक पीपीएफ खाते में भारी मात्रा में निवेश किया गया है।
न्यायमूर्ति एस.मुरलीधर ने अपनी पत्नी के नाम से मयूर विहार में तीन बेडरूम का एक फ्लैट खरीदा है। यहीं पर न्यायमूर्ति जे.आर.मिधा ने दक्षिणी और पूर्वी दिल्ली में अपनी पत्नी के नाम दो संपत्तियां खरीदी हैं।
दूसरी ओर न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता के पास उनके नाम से सिर्फ एक संपत्ति है, जिसके लिए उन्होंने बैंक से ऋण ले रखा है और अभी तक वह ऋण अदा कर रही हैं।
न्यायमूर्ति ए.के.पाठक और न्यायमूर्ति इंदरमीत कोचर, जो कि पति-पत्नी हैं, के नाम संयुक्त रूप से ग्रेटर नोएडा में एक संपत्ति है। कोचर के नाम 60 लाख रुपये के फिक्स डिपॉजिट के साथ ही और कई सारे निवेश हैं।
ज्ञात हो कि दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने शुक्रवार को अपनी संपत्तियों की घोषणा की है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश पहले ही अपनी संपत्तियों की घोषणा कर चुके हैं। संपत्तियों के बारे में जानकारी अदालत की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
पिछले महीने दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में देश के प्रधान न्यायाधीश के पद को सूचना का अधिकार कानून के दायरे में ला खड़ा कर दिया था और कहा था कि उस कानून के तहत न्यायाधीशों को अपनी संपत्तियों की घोषणा करनी चाहिए।
केरल और मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पहले ही अपनी संपत्तियों की घोषणा कर चुके हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी न्यायाधीशों को संपत्ति की घोषणा करने के लिए एक प्रस्ताव पारित कर दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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