हबीब तनवीर, पंडित भीमसेन जोशी को जीवनकालीन उपलब्धि पुरस्कार
तनवीर को रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य, छत्तीसगढ़ी लोक गाथाओं के प्रदर्शन और रंगमंच के क्षेत्र में सामयिक परिवर्तन में सराहनीय कार्य के लिए जीवकालीन उपलब्धि पुरस्कार दिया गया। उन्होंने रंगमंच को एक अलग शैली में और सादगी से जोरदार तरीके में प्रदर्शित किया। उन्हें 1969 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1983 में पद्मश्री, 1996 में संगीत नाटक अकादमी फैलोशीप और 2002 में पदमभूषण से सम्मानित किया गया। वे 1972 से 1978 के बीच राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे। उनके नाटक चरणदास चोर को 1982 में एडिनबर्ग इंटरनेशनल ड्रामा फेस्टिवल में फ्रिंज फर्स्ट अवार्ड मिला। उनका लंबी बीमारी के बाद 85 वर्ष की उम्र में भोपाल में निधन हुआ।
पंडित भीमसेन जोशी ने गायन के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बनाई। सवाई गंधर्व संगीत महोत्सव में उनका प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा। यह आयोजन हर साल पुणे में किया जाता है। राष्ट्रीय एकता पर आधारित गीत मिले सुर मेरा-तुम्हारा के लिए उन्हें सदैव याद रखा जाएगा।
इस गीत में भारत के करोड़ों लोगों को एकसूत्र में बांधने का कार्य किया। उनके स्वर का जादू सभी को आनंदित करता है। उन्हें 1972 में पद्मश्री, 1976 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1985 में पद्मभूषण, 1999 में पद्मविभूषण और 2008 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर दीक्षित ने जाने-माने कलाकारों, विद्वानों, लेखकों और अधिकारियों के समूह को संबोधित करते हुए कहा कि कलाकार और लेखक किसी भी राष्ट्र की दौलत माने जाते हैं और वे समाज को दिशा, दर्शन और मार्गदर्शन देने का काम करते हैं। लेखक और कलाकार देश और समाज के उज्जवल भविष्य में भी योगदान देते हैं।
दीक्षित ने कहा कि उनकी सरकार जाने-माने कलाकारों, लेखकों, कवियों और विद्वानों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित करती रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आज हबीब तनवीर और पंडित भीमसेन जोशी को जीवनकालीन उपलब्धि पुरस्कार से सम्मानित करके गौरवान्वित महसूस कर रही है।
दिल्ली सरकार की साहित्य कला परिषद ने 2004 में जीवनकालीन उपब्धि पुरस्कार की शुरुआत की थी जो कि नृत्य, संगीत, रंगमंच, कला और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जानी-मानी हस्तियों को दिया जाता है। 2004 में कर्नाटक संगीत में एम.एस. सुबुलक्ष्मी, 2007 में ध्रुपद संगीत में उस्ताद रहीम फहीमुद्दीन डागर और 2008 में रंगमंच और कला क्षेत्र में इब्राहिम अकालजी को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जोहरा सहगत और कपिला वात्सायायन को भी पिछले साल इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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