चेतावनी को दरकिनार कर मुंबई पहुंचे राहुल, लोकल ट्रेन के मुसाफिर बने (लीड-3)
शिव सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा काले झंडे दिखाने और प्रदर्शन करने तथा राहुल के पुतले जलाने जैसी इक्का-दुक्का घटनाओं को छोड़ उनका मुंबई दौरा बिना किसी अप्रिय घटना के शांतिपूर्वक संपन्न हो गया।
अपने दौरे को और ज्यादा असरदार बनाने के लिए राहुल ने एक ऐसा कदम उठाया जो उनके कद के किसी अन्य राष्ट्रीय नेता ने हाल-फिलहाल में नहीं उठाया था। वह मुंबई की दो उपनगरीय रेलगाड़ियों में जनता के हमसफर बने।
सुरक्षा इंतजामों और इंतजार करते हेलीकॉप्टर की परवाह न करते हुए वह आम मुंबईवासी की तरह लोकल ट्रेन में सवार होकर अंधेरी से दादर गए। वह दोपहर 1.17 बजे दादर स्टेशन पहुंचे।
उससे पहले कानून का पालन करने वाले किसी भी आम शहरी की तरह राहुल ने अपनी जेबें टटोलीं, पैसे नहीं मिलने पर वह अंधेरी स्टेशन के समीप बने एटीएम में गए।
उसके बाद कांग्रेस महासचिव टिकट खरीदने के लिए कतार में लगे और फिर पश्चिमी रेलवे की लोकल ट्रेन में सवार हुए।
हजारों मुसाफिर अपने बीच राहुल गांधी जैसे अतिविशिष्ट व्यक्ति को पाकर हैरान रह गए। बहुत से लोगों ने उनके करीब जाने या उनसे हाथ मिलाने की भी कोशिश की। इसकी वजह से सुरक्षाकर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। उसके बाद वह दादर से मध्य रेलवे की लोकल ट्रेन में सवार होकर घाटकोपर गए।
दादर और घाटकोपर दोनों ही जगहों पर बड़ी संख्या में लोगों ने राहुल को घेर लिया। दोनों ही स्थानों पर मुंबई के पुलिस आयुक्त डी. शिवानंदन और संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) राकेश मारिया उनके साथ थे।
घाटकोपर से वह सीधे रमाबाई अंबेडकर नगर झुग्गी बस्ती में गए। उन्होंने अपने जूते उतारे और भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और अन्य लोग गर्मी में डेढ़ घंटे से ज्यादा देर तक राहुल की प्रतीक्षा करते रहे। उसके बाद सभी नेता हेलीकॉप्टर में सवार होकर रवाना हो गए।
शिवसेना के गढ़ में राहुल की इस यात्रा को उनकी राजनीतिक विजय के रूप में देखा जा रहा है।
रमाबाई अंबेडर नगर झुग्गी बस्ती में राहुल कई बार रुके, लोगों से बातचीत की और उन्हें ऑटोग्राफ दिए। 80 बरस की एक वृद्धा ने बताया कि वह राहुल बेटे को देखने के लिए ही यहां तक आने की हिम्मत जुटा पाई है।
उधर शिवसेना ने राहुल के लोकल ट्रेन में सफर करने को नाटक करार देते हुए कहा है कि इससे मुसाफिरों को असुविधा हुई।
शिवसेना के प्रवक्ता नीलम गोरे ने टीवी चैनलों से कहा कि यदि वह आम आदमी के लिए इतने ही चिंतित हैं तो उन्होंने जुहू हवाई अड्डे से भाईदास ऑडिटोरिम तक के महज एक किलोमीटर के फासले को पैदल क्यों नहीं पार किया।
राहुल के मुंबई दौरे के मद्देनजर शुक्रवार को यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। यह सुनिश्चित किया गया था कि उन्हें कोई भी काले झंडे न दिखा सके।
राहुल सुबह करीब 11.00 बजे लगभग कर्फ्यू जैसे हालात में यहां पहुंचे लेकिन चार घंटे बाद जब वे पुड्डुचेरी रवाना हुए, तो माहौल बिल्कुल जुदा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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