देश में मिरगी से ग्रस्त हैं 1 करोड़ लोग
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के तंत्रिका विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर ममता भूषण सिंह ने बताया," मिरगी से संबंधित लगभग 70-80 फीसदी मरीज इलाज नहीं करा रहे हैं या फिर अपर्याप्त इलाज करा रहे हैं। इस मामले में यह एक निराशाजनक स्थिति है।"
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में मंगलवार को 'मिरगी के बारे में जागरुकता फैलाने की आवश्यकता' विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सिंह ने कहा कि देश में मिरगी से ग्रसित रोगियों की तुलना में बहुत कम तंत्रिका विज्ञानी हैं।
मिरगी के बारे में लोगों को जागरुक करने की आवश्यकता है। हमें चिकित्सकों के अलावा शिक्षकों और सलाहकारों की सहायता की जरुरत है क्योंकि मिरगी का इलाज संभव है।
सिंह ने इस बीमारी के बारे में बताते हुए कहा कि बच्चों के छतों पर से गिरने, खेल के दौरान सिर में चोट लगने से यह बीमारी उत्पन्न हो सकती है। ज्यादातर दुपहिया चालक वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग नहीं करते हैं और गिरने के दौरान अक्सर उनके सिर में चोट लग जाती है जो इस बीमारी का कारण बनती है।
गौरतलब है कि अत्यधिक शराब का सेवन करने वाले या फिर अनिद्रा के शिकार लोग भी मिरगी से ग्रस्त हो सकते हैं।
सिंह ने कहा कि आजकल मिरगी के इलाज के लिए बहुत अच्छी दवाएं मौजूद हैं और सभी लोगों की पहुंच के अंदर है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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