महंगाई के दबाव में रिजर्व बैंक का सीआरआर में इजाफा (राउंडअप)
आरबीआई ने इससे पहले विकास दर छह से साढ़े छह फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया था।
वाणिज्यिक बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के समक्ष तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 75 आधार अंकों यानी 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की। सीआरआर में इस वृद्धि से वित्तीय व्यवस्था में उपलब्ध तरलता में 36 हजार करोड़ रुपये की कमी आएगी।
अब सीआरआर दर 5.75 फीसदी हो जाएगी। इसे दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में 13 फरवरी को सीआरआर की दर 0.50 फीसदी बढ़ाई जाएगी जबकि दूसरे चरण में 27 फरवरी को इसमें 0.25 फीसदी की वृद्धि होगी। आरबीआई ने अन्य सभी दरों को अपरिवर्तित रखा है।
चालू वित्त वर्ष की अंतिम समीक्षा जारी करते हुए सुब्बाराव ने कहा कि तरलता में कमी से मुद्रास्फीति पर अंकुश लगेगा।
उन्होंने कहा, "कृषि क्षेत्र में शून्य फीसदी की विकास दर के बावजूद औद्योगिक उत्पादन व सेवा क्षेत्र में हो रहे सुधार के आधार पर वर्ष 2009-10 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद की दर बढ़कर अब 7.5 फीसदी रहने का अनुमान है।"
उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार को देखते हुए मौद्रिक नीति में यह बदलाव किया गया है।
उन्होंने कहा, "सुधार को देखते हुए हमने अपना ध्यान 'संकट के प्रबंधन' से 'सुधार के प्रबंधन' पर केंद्रित किया है।"
उन्होंने कहा कि हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति का दबाव मुख्य रूप से आपूर्ति के स्तर पर बाधा के कारण है।
आरबीआई की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "वैश्विक स्तर पर कमोडिटी की उच्च कीमतों और घरेलू स्तर पर मांग और आपूर्ति के संतुलन को देखते हुए मार्च के अंत तक थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 8.5 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है।"
आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति के समायोजन के बजाय मौद्रिक विस्तार पर नजर रखने के कारण वित्तीय व्यवस्था में ऋण के लिए धन की उपलब्धता में कमी आने की आशंका जाहिर की जा रही है।
नई दिल्ली में वित्त सचिव अशोक चावला ने आरबीआई के कदमों को सही बताते हुए आश्वस्त किया कि ब्याज दरों में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
उन्होंने कहा, "इसका असर व्यवस्था में अतिरिक्त तरलता पर पड़ेगा।"
इसी आशंका के चलते सीआरआर में बढ़ोतरी के कारण एक समय बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 325 अंकों तक लुढ़क गया था, हालांकि बाद में इसमें सुधार आया और यह बढ़त के साथ बंद हुआ।
मौद्रिक नीति समीक्षा के मुख्य बिंदु निम्न हैं :
- नकद आरक्षित अनुपात 75 आधार अंक बढ़कर 5.75 फीसदी हुआ।
- व्यवस्था से 36 हजार करोड़ रुपये की तरलता कम होगी।
- बैंक दर 6.0 फीसदी बरकरार।
- रेपो दर 4.75 फीसदी पर कायम।
- रिवर्स रेपो दर 3.25 फीसदी पूर्ववत।
- आर्थिक विकास दर अनुमान छह फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी की गई।
- वार्षिक मुद्रास्फीति दर अनुमान को 6.5 फीसदी से बढ़कार 8.5 फीसदी किया गया।
- वैश्विक स्थितियों को देखते हुए मुद्रास्फीति की समस्या बढ़ने की संभावना।
- वर्ष 2010-11 के लिए मैद्रिक नीति 20 अप्रैल को जारी की जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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