चटवाल मामले में सरकार ने दी सफाई

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चटवाल को यह सम्मान दिए जाने पर सवाल उठाया था। भाजपा ने आपत्ति जताई थी कि 1992-94 के बीच चटवाल पर बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर 90 लाख डॉलर के गबन में मिलीभगत का आरोप लगा था और इस संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोप पत्र भी दायर किया था।
भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने इस सिलसिले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र भी लिखा था। उन्होंने चटवाल से यह सम्मान वापस लिए जाने की मांग की थी।
गृह मंत्रालय की ओर से इस संबंध में दिए गए स्पष्टीकरण में बुधवार को कहा गया, "जहां तक चटवाल के खिलाफ आरोपों का सवाल है तो यह स्पष्ट किया जाता है कि 1992-94 के बीच सीबीआई ने बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया के साथ धोखाधड़ी करने के इरादे से मिलीभगत करने के उनके और बैंक के कुछ अधिकारियों के खिलाफ पांच मामले दर्ज किए गए थे। सीबीआई ने खुद तीन मामले बंद कर दिए और जिन शेष दो मामलों में उसने मुंबई में सीबीआई की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए, उन दोनों में वह अदालत से बरी हो गए। अब चटवाल के खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है।"
बयान में कहा गया, "चटवाल अमेरिका में भारत के हितों के लिए निरंतर प्रयासरत रहे हैं। वह भारतीय अमेरिकी समुदाय के प्रमुख नेता हैं अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों के बीच परमाणु करार के पक्ष में समर्थन जुटाने में लगे अप्रवासी भारतीयों में एक सक्रिय सदस्य थे।"
इस बीच, चटवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा उनको पद्मभूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा पर राजनीति कर रही है। चटवाल ने कहा, "मुझे 'एलिस आइजलैंड मेडल ऑफ ऑनर' भी दिया था। यह पुरस्कार अमेरिकी सरकार की ओर से किसी के बारे में यह पता कर लेने के बाद दिया जाता है कि उसके खिलाफ कोई मामला तो नहीं है।"
उन्होंने कहा, "मुझे भाजपा की आपत्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैं अपने देश से प्यार करता हूं और उसके लिए विगत 30 वर्षो से काम कर रहा हूं। मैं राजनीतिक दलों की परवाह नहीं करता। वे तो आते-जाते रहते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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