हिंसा के दौर में बुद्ध के उपदेश अधिक प्रासंगिक : धूमल

धूमल ने रविवार को गुजरात के बड़ोदरा में 'गुजरात में बौद्धमत विरासत' अंतर्राष्ट्रीय समारोह के अवसर पर कहा कि भगवान बुद्घ के उपदेश आज के युग में और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं, जब विश्व आंतकवाद व हिंसा से जूझ रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में भगवान बुद्घ का अहिंसा का संदेश समाज को नई राह दिखा सकता है। उन्होंने कहा कि बौद्धमत में कायरों के लिए कोई स्थान नहीं है, दरअसल कायर और कमजोर अहिंसा को धारण कर ही नहीं सकता और बलवान ही क्षमा कर सकता है, ऐसे में अहिंसा की साधना केवल ताकतवर ही कर सकता है।

धूमल ने कहा कि हिंसा से डर, व अशांति पैदा होती है, जबकि अहिंसा हमें निडर होकर जीना सिखाती है। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में भारतीय अंहिसा, शांति व आपसी भाईचारे के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की भारत कर्मस्थली रही है। भगवान बुद्ध के उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने 2500 वर्ष पूर्व थे। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव भारतीयों के संस्कार का हिस्सा बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि बुद्घ के ज्ञान का भारत के सांस्कृतिक यात्रा में महत्वपूर्ण स्थान है, इसे बिना समझे भारत को यूं कहे कि एशिया की मानसिकता का समझना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्घ ने सारे देश को एकता के सूत्र में बांधने के लिए जिस जातिविहिन समाज व करूणा, अहिंसा का प्रसार किया था। मानव मात्र को जोड़ने व मानवता को जिंदा रखने के लिए बौद्घ भिक्षुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है इसी रास्ते की खोज के लिए हम सभी यहां इकट्ठे हुए हैं और रास्ता हमें अवश्य मिलेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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