उप्र में 71 प्रतिशत सूर्य ग्रहण के दर्शन

पश्चिम उत्तर-प्रदेश के कई शहरों में वैज्ञानिक संस्थाओं व विज्ञान क्लबों के माध्यमों से स्कूली छात्रों व बच्चों को खगोलीय घटना से अवगत कराया गया। सूर्य ग्रहण शुक्रवार को उन बच्चों के लिए बहुत रोमांचक पल लेकर आया है जो अभी बाल्यावस्था के कारण खगोलीय घटनाओं को समझ नहीं पाते हैं। अब शायद ही उन्हें इस जन्म में उन्हें इस तरह की दुर्लभ खगोलीय घटना के दर्शन हो सके।

उत्तर-प्रदेश की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा मुजफ्फरनगर में वलयाकार सूर्यग्रहण के दर्शन कराने हेतु सोलर चश्मो एवं टेलीस्कोप का प्रबंध किया गया था। जनसाधारण को सुरक्षित रूप से सूर्यग्रहण दिखाने के लिए यह पहल की गई थी।

इस कार्यक्रम की समन्वयक राजबीरी देवी ने बताया कि सूर्य को परावर्तित प्रतिबिंब की सहायता से दिखाया गया था। पिन होल के द्वारा सूर्य का प्रतिबिंब दीवार पर डाला गया। एक अन्य तरीके से भी सूर्य ग्रहण देखा गया जिसमें एक छोटे से शीशे को कागज से ढका गया जिसमें एक छेद कर तथा उनकी चौड़ाई 1-2 सेमी की गई। उसकी सहायता से सूर्य के प्रतिबिंब को देखा गया। टेलीस्कोप की सहायता से सूर्य ग्रहण अवलोकन के समय इसके आगे के लेंस के सामने सुरक्षित व प्रमाणित सोलर फिल्टर लगाकर देखा गया।

उन्होंने बताया कि नंगी आंखों से सूर्यग्रहण देखना घातक बन सकता है। क्योंकि सूर्य ग्रहण में सूर्य से आने वाले प्रकाश से 52 प्रतिशत अपरक्त किरणें होती हैं, जिन्होंने खुली आंखों से शुक्रवार को सूर्यग्रहण को भूल से देख लिया है वो अपनी आंखों की रोशनी को स्थायी रूप से क्षति से बचाए रखने के लिए अवश्य ही नेत्र विशेषज्ञ की सलाह लें।

सूर्य ग्रहण गाजियाबाद में 54 प्रतिशत, पीलीभीत में 60 प्रतिशत, प्रतापगढ़ में 67 प्रतिशत फरुखाबाद में 61 प्रतिशत, बदरीनाथ में 44, बुलंदशहर में 56, मथुरा में 57, मिर्जापुर में 67 प्रतिशत, बलिया में 71 प्रतिशत, बरेली में 56 प्रतिशत, आगरा में 46, कानपुर में 52, अयोध्या में 65, इलाहाबाद में 66, वाराणसी में 69, लखनऊ में 62 और हरिद्वार में 52 प्रतिशत दिखाई दिया।

सबसे अधिक उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में सूर्यग्रहण 71 प्रतिशत व आगरा में सबसे कम 46 प्रतिशत दिखाई पड़ा। उत्तर प्रदेश में दोपहर 1 बजकर 40 मिनट से 1 बजकर 50 मिनट तक यह दिखाई पड़ा। पश्चिम व उत्तराखण्ड के इलाकों में 56 फीसदी तक सूर्य को ढका हुआ देखा गया।

सूर्य ग्रहण के चलते शहरों में जनजीवन कुछ घण्टों के लिए थम गया। साढे ग्यारह से साढ़े तीन बजे तक अनेक शहरों को सुनसान देखा गया। खासकर महिला व बच्चे इस घटना को लेकर बहुत आशंकित रहे। महिलाओं ने वैज्ञानिक युग में भी धार्मिक अनुष्ठान कर ग्रहण में दान देना शुभ समझा।

बच्चों को लेकर महिलाएं बहुत परेशान रहीं। बच्चे सूर्यग्रहण में घर से बाहर निकलकर खेलना चाहते थे लेकिन उनहें परिजन रोक रहे थे। आखिर उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि हर दिन आकाश में निकलने वाले सूरज को परिजन आज क्यों देखने से रोक रहे हैं जबकि वह सर्दी के मौसम में हर दिन धूप में बैठने का इंतजार करते थे। इन्हीं सवालों व शंकाओं के साथ बच्चों को लेकर परिजनों ने ग्रहण समाप्त होने पर ही राहत की सांस ली।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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