सूर्यग्रहण : अद्भुत खगोलीय नजारे पर सभी की निगाहें (लीड-1)

सहस्राब्दी के सबसे लंबा सूर्यग्रहण कुंडलाकार है। दिल्ली में आंशिक सूर्य ग्रहण ही दिखेगा लेकिन इस दिव्य नजारे को देखने के लिए लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं है। यहां सुबह 11.53 बजे से दोपहर बाद 3.11 बजे तक इसे देखा जा सकेगा। दोपहर 1.39 बजे सबसे अधिक 53 प्रतिशत तक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा। नेहरू तारा मंडल में और एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स एसोसिएशन ने लोगों को यह अनोखा नजारा दिखाने की व्यवस्था की है।

उत्तर प्रदेश के वैज्ञानिक संस्थानों और विद्यालयों में सूर्यग्रहण का नजारा लोगों दिखाने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला के प्रमुख अनिल यादव ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि लोगों को यह अनोखी खगोलीय घटना दिखाने के लिए खास प्रबंध किए गए। उन्होंने कहा कि इसके लिए 6,500 विशेष चश्मे खरीदे गए हैं, साथ ही कई दूरबीन लगाई गई हैं।

यादव ने बताया कि लखनऊ में सूर्यग्रहण की शुरुआत सुबह 11.57 पर होगी, दोपहर 1.45 मिनट पर यह अपने चरम पर होगा और अपराह्न् 3.18 मिनट पर समाप्त होगा। लखनऊ में केवल 51.12 प्रतिशत ग्रहण देखा जा सकेगा। बलिया जिले में सबसे अधिक 71 प्रतिशत ग्रहण दिखाई देगा।

मध्य प्रदेश में भी सूर्य ग्रहण को लेकर हर किसी में उत्साह है। भोपाल और उज्जैन में लोगों को सूर्यग्रहण का नजारा दिखाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। भोपाल में क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र ने टेलीस्कोप के जरिए इस खगोलीय घटना को दिखाने का इंतजाम किया है।

हिमाचल प्रदेश में अद्भुत नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग ऐतिहासिक रिज इलाके में इकट्ठा हुए। हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी कामराज कैस्थ ने कहा कि ऐतिहासिक रिज इलाके में बड़ी संख्या में लोग सूर्यग्रहण का नजारा देखने के लिए इकट्ठा हुए।

कुंडलाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं लेकिन चंद्रमा की छाया सूर्य की परिधि की अपेक्षा छोटी होती है। इस प्रकार चंद्रमा से ढका हुआ सूर्य 'वलयाकार' के रूप में नजर आता है और चंद्रमा की छाया के चारों ओर से सूर्य की किरणें निकलती हुई दिखाई देती हैं।

सूर्य ग्रहण के प्रभावों के अध्ययन के लिए इसरो आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा और केरल के थुंबा स्थित केंद्रों से रॉकेटों की एक श्रेणी प्रक्षेपित कर रहा है। ये रॉकेट अपने साथ कुछ यंत्र लेकर जाएंगे जो ऊपरी वायुमंडल में भौतिक परिवर्तनों का मापन करेंगे। इसरो के परियोजना निदेशक पी.रत्नाकर रॉव ने आईएएनएस को बताया कि शुक्रवार को दोपहर एक बजे से लेकर तीन बजे तक पांच रॉकेट प्रक्षेपित किए जाएंगे।

इन रॉकेटों से सूर्य ग्रहण से जुड़े विभिन्न वायुमंडलीय और आयनमंडलीय मानकों का मापन किया जाएग। थुंबा इक्वाटोरियल रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र (टीईआरएलएस) से रोहिणी रॉकेट का प्रक्षेपण किया जाएगा। ये रॉकेट अपने साथ कुछ यंत्र लेकर जाएंगे जो ऊपरी वायुमंडल में भौतिक परिवर्तनों का मापन करेंगे। इसरो रोहिणी रॉकेट (आरएच 560 एमके 2) को श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित करेगा। शनिवार को भी दोपहर एक से दो बजे के बीच रॉकेट का प्रक्षेपण किया जाएगा।

उधर, हरिद्वार में शुक्रवार को सूर्यग्रहण के दौरान सभी मंदिरों के द्वार बंद रखे गए। हरिद्वार के स्थानीय पुजारियों के अनुसार ऐसा सूर्यग्रहण के प्रतिकूल प्रभावों के मद्देनजर किया गया। महाकुंभ की मेजबानी कर रहे इस धार्मिक शहर में सूर्यग्रहण के दौरान पवित्र गंगा नदी में स्नान भी प्रभावित होगा।

उल्लेखनीय है कि सूर्यग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और इसकी छाया सूर्य पर पड़ती है, जिसकी वजह से सूर्य आंशिक अथवा पूरी तरह ढक जाता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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