इस्तीफे के बाद भी सीआईसी पद पर हबीबुल्लाह के काबिज रहने पर सवाल
नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। सूचना का अधिकार(आरटीआई)के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने प्रधानमंत्री कार्यालय को एक कानूनी नोटिस भेजकर पूछा है कि मुख्य सूचना आयुक्त पद से इस्तीफे के बावजूद वजाहत हबीबुल्लाह इस पद पर अभी भी काबिज क्यों हैं।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को भी एक कानूनी नोटिस भेजकर यही सवाल पूछा गया है। कहा जाता है कि हबीबुल्लाह ने 20 अक्टूबर, 2009 को केंद्रीय सूचना आयोग के सीआईसी पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन इस पद पर वह अभी भी बने हुए है।
आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस्तीफे के बावजूद हबीबुल्लाह के इस पद पर बने रहना आरटीआई कानून 2005 और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के प्रावधानों के खिलाफ है।
कानूनी नोटिस भेजने वाले आरटीआई कार्यकर्ता गिरीश मित्तल ने आईएएनएस से मुंबई से फोन पर बातचीत करते हुए कहा, "आरटीआई कानून की धारा 13(4) के मुताबिक सीआईसी प्रमुख समेत सूचना आयुक्तों का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से अमल में आ जाता है। जैसे ही कोई आयुक्त राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपता है, उसका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से अमल में आ जाता है। किसी भी सूरत में इस्तीफे को वापस नहीं लिया जा सकता और न ही इसे लंबित अवस्था में रखा जा सकता है, फिर हबीबुल्लाह को किस कानून के तहत इस पद पर बने रहने दिया गया है?"
मित्तल ने बताया कि जब कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने सूचना आयुक्त ओमिता पॉल के मामले में कानूनी मामलों के विभाग से राय मांगी थी, तो इसी तरह के दिशानिर्देश दिए गए थे।
जब इस पूरे मामले को लेकर आईएएनएस ने हबीबुल्लाह से पूछा तो उन्होंने कहा, "मैं तो केंद्र सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहा हूं। मैं खुद चाहता हूं कि इस जिम्मेवारी से मुक्त होकर अपना नया दायित्व संभालूं।" उल्लेखनीय है कि हबीबुल्लाह अपने इस्तीफे के बाद जम्मू-कश्मीर के प्रथम सीआईसी का पद संभालने वाले थे। राज्य में पिछले साल मार्च में आरटीआई कानून लागू हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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