शेख हसीना को इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार (लीड-1)
राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने उन्हें यह पुरस्कार दिया। इस अवसर पर पाटील ने कहा, "इतिहास में शायद ही यह देखा गया है कि किसी राष्ट्र की उत्पत्ति और उसका राजनीतिक जीवन किसी व्यक्ति विशेष का पर्याय हो। शेख हसीना और बांग्लादेश के मामले में ऐसा ही है।"
उन्होंने कहा, "देश के प्रति अपने समर्पण, अपनी दृढ़ता और अपने नेतृत्व से उन्होंने बांग्लादेश को एक नई दिशा दी तथा उसके विकास और उसकी प्रगति के लिए लगातार प्रयासरत हैं।"
पाटील ने यह भी कहा, "हसीना के नेतृत्व में अवामी लीग की शानदार चुनावी सफलता और बांग्लादेश में लोकतंत्र की पुन: स्थापना का विश्व भर में स्वागत किया गया। बांग्लादेश के आर्थिक विकास, कल्याण और सामाजिक न्याय के लिए उन्होंने और उनकी सरकार ने एक महत्वाकांक्षी एजेंडा तय किया है।"
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "बांग्लादेश में लोकतंत्र का फिर से लौटना हसीना की साहस, उनके त्याग और जनता के प्रति उनके अपार विश्वास को दर्शाता है। लोकतंत्र की बहाली में अपने अमूल्य योगदान से हसीना ने बांग्लादेश की जनता को उनकी वास्तविक क्षमता का अहसास कराया और देश में शांति व समृद्धि को मजबूत किया।"
उन्होंने कहा, "हसीना ने अपने राजनीतिक करियर के दौरान बगैर थके बांग्लादेश की जनता के कल्याण और उनके सामाजिक आर्थिक विकास के लिए काम किया। क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में भी उन्होंने इसी प्रकार काम किया है।"
इंदिरा गांधी स्मृति न्यास की ओर से 1986 में यह पुरस्कार आरंभ हुआ था। इसके तहत 25 लाख रुपये की नकद राशि तथा एक प्रशस्ति पत्र भेंट किया जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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