सीआईए के ठिकाने पर हमले के पीछे आईएसआई का हाथ!

वाशिंगटन, 12 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के सामरिक हलकों में यह चर्चा गर्म है कि कुछ दिनों पहले अफगानिस्तान में केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) के ठिकाने पर हुए आतंकवादी हमले के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'इंटर-सर्विसेज इंटेलीजेंस' (आईएसआई) का हाथ था।

अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत में विगत 30 दिसम्बर को सीआईए के एक ठिकाने पर आत्मघाती बम हमला हुआ था। इस हमले में सीआईए के कई एजेंट मारे गए थे।

अमेरिका के विख्यात थिंक टैंक 'स्ट्रेटफोर' का मानना है कि इस हमले के लिए संभवत: आईएसएआई के निचले स्तर के लोगों ने आतंकवादियों की मदद की थी। इस संस्था का कहना है कि बिना किसी मदद के आतंकवादियों द्वारा सीआईए के खिलाफ इतने बड़े हमले को अंजाम देना असंभव लगता है।

इस वैश्विक संस्था ने कहा, "यह सच है कि अमेरिका को क्रुद्ध करके पाकिस्तान बहुत कुछ हासिल होने वाला नहीं है। इसके बावजूद ऐसी अफवाहे हैं कि पाकिस्तान के जरिए तालिबान को कुछ सांस लेने का मौका जरूर मिल रहा है। इससे अमेरिका-पाक संबंध भी प्रभावित होगा।"

दरअसल, सीआईए के ठिकाने पर हुए विस्फोट की जांच से जुड़ी अमेरिकी और अफगानी सरकार की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा जा रहा है कि विस्फोट के लिए इस्तेमाल किए गए उपकरणों से आईएसआई की ओर उंगली उठा रही है।

स्ट्रेटफोर ने मंबई हमले का हवाला देते हुए कहा है कि पाकिस्तान में ऐसी स्थिति पैदा हुई है जहां उसका अपनी सुरक्षा एजेसियों पर नियंत्रण कम हुआ लगता है और ऐसे में यह अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

संस्था का कहना है, "फिलहाल इस्लामाबाद का हालत भयावह नहीं है परंतु जेहादी अमेरिका-पाकिस्तान और भारत-पाकिस्तान संबंधों में खटास चाहते हैं ताकि वे अपने वजूद को जिंदा रख सकें। जेहादियों को मौजूदा समय में अमेरिकी और पाकिस्तानी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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