कर्नाटक के जंगली हाथियों को मिला नव वर्ष का उपहार

नई दिल्ली, 9 जनवरी (आईएएनएस)। कर्नाटक वन विभाग को 25 एकड़ से ज्यादा भूमि दान की गई है ताकि जंगली हाथी दो संरक्षित वनों के बीच के गलियारे पर स्वतंत्र विचरण कर सकें। इसे एशिया में जानवरों और पशुओं के संरक्षण के लिए उठाया गया ऐसा पहला कदम कहा जा सकता है।

क्रिसमस की पूर्व संध्या पर वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) ने कर्नाटक के चमाराजानगर जिले की यह जमीन वनीकरण के कार्य के लिए वन विभाग को दे दी है। यह जमीन कोल्लीगल वन और बिलिगिरि रंगास्वामी टेंपल वन्य जीव अभ्यारण्य को जोड़ती है। अपने वार्षिक प्रवास के दौरान सैकड़ों हाथी इस जमीन से होकर गुजरते हैं।

पर्यावरणविद कहते हैं कि यह क्षेत्र 12,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले नीलगिरी और पश्चिमी घाटों का हिस्सा है और बाघ व वन्य जीव अभ्यारण्य भी इसके तहत आते हैं। यह क्षेत्र एशिया का अकेला ऐसा क्षेत्र है जहां जंगली हाथियों की सबसे अधिक आबादी है। यहां करीब 6,000 हाथी रहते हैं।

सत्रह ग्रामीण इस भूमि के मालिक थे। डब्ल्यूटीआई ने 2007 में अमेरिकी स्वयं सेवी संगठन 'इंटरनेशनल फंड फॉर एनीमल वेलफेयर' (आईएफएडब्ल्यू) की मदद से ग्रामीणों से यह जमीन खरीद ली थी।

डब्ल्यूटीआई के एक अधिकारी बी. रामाकृष्णन के मुताबिक ग्रामीण इस भूमि पर अन्न उगाते थे लेकिन अक्सर हाथियों द्वारा फसल नष्ट कर देने से उनके और हाथियों के बीच संघर्ष होता था। अब यह क्षेत्र हाथियों के लिए संरक्षित है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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