आर्सेलर मित्तल की इस्पात परियोजना में देरी से झारखण्ड सरकार चिंतित
दास ने आईएएनएस को बताया, "हम आर्सेलर मित्तल की इस्पात परियोजनाओं सहित सभी इस्पात परियोजना को लेकर चिंतित हैं। सरकार राज्य के खूटी और गुमला जिलों में मित्तल इस्पात संयंत्र को स्थापित करने में मदद हेतु रास्ते निकालेगी।"
दास ने कहा, "झारखण्ड लगभग एक साल तक राष्ट्रपति शासन के अधीन रहा। यहां लगातार अस्थिर सरकारें रहीं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हम इस्पात परियोजनाओं को स्थापित करने के तरीकों पर काम करेंगे।"
ज्ञात हो कि आर्सेलर मित्तल के प्रमुख एल.एन.मित्तल ने परियोजनाओं में हो रही देरी को लेकर चिंता जाहिर की है। कंपनी ने एक अन्य इस्पात संयंत्र लगाने के लिए कर्नाटक सरकार के साथ समझौता किया है। इस समझौते का यह अर्थ लगाया जा रहा है कि कंपनी झारखण्ड से अपनी परियोजना को कर्नाटक स्थानांतरित करेगी।
आर्सेलर मित्तल ने 120 लाख टन इस्पात उत्पादन की क्षमता का संयंत्र लगाने के लिए झारखण्ड सरकार के साथ वर्ष 2005 में एक समझौता किया था। इस संयंत्र के लिए 400 अरब रुपये का निवेश किया जाना था। मित्तल स्टील के अधिकारियों का कहना है कि देरी के कारण झारखण्ड परियोजना की लागत बढ़ती जा रही है।
मित्तल स्टील की 11,000 एकड़ क्षेत्र में परियोजना लगाने की योजना थी लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण अभी तक भूमि अधिग्रहण नहीं सका है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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