मध्य प्रदेश में 'लाडली' हुई असहाय!
पिछले एक माह के दरम्यान हुई ये घटनाएं प्रदेश में लड़कियों के असुरक्षित होने की कहानी बयां करती है। मध्य प्रदेश देश का वह राज्य है जहां बालिकाओं के जन्म से लेकर विवाह तक के लिए 'लाडली लक्ष्मी' और 'मुख्यमंत्री कन्यादान' योजना चलाई जा रही हैं। इतना कुछ होने के बावजूद बालिकाएं बढ़ते अपराधों के बीच अपने आपको सुरक्षित नहीं पा रही हैं।
महिलाओं के लिए काम करने वाले संगठन की प्रार्थना मिश्रा कहती हैं कि प्रदेश में इतनी घटनाएं होने बाद के भी सरकार और प्रशासनिक स्तर पर ऐसी कोई पहल नहीं की गई है, जिससे ऐसा लगे कि उसने इन वारदातों को गंभीरता से लिया है। अपराधियों में सजा का डर तक नहीं रहा है और वे अपराध किए जा रहे है। यही कारण है कि महिलाएं और लड़कियां अपने साथ होने वाली ज्यादतियों को खुलकर बता ही नहीं पाती हैं।
भोजन के अधिकार अभियान से जुड़ी रोली शिवहरे कहती हैं कि सरकार ने नगरीय निकाय और पंचायतों मे 50 प्रतिशत आरक्षण देकर खुद को महिला हिमायती होने का भरोसा दिलाया है, परंतु लड़कियों के साथ हो रहे अत्याचार पर वह मौन है। वे कहती हैं, "एक तरफ लड़कियां शिकार बन रही है वहीं उन पर सख्ती बरती जा रही है। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने तो छात्रावास में रहने वाली लड़कियों के लिए सख्त निर्देश ही जारी कर दिए है। एक तरह से उनके निकलने पर ही रोक लगाई जा रही है। यह स्थितियां छात्राओं के हित में कतई नहीं कही जा सकती।"
राज्य महिला आयोग की सदस्य सुषमा जैन इन घटनाओं के लिए किसी एक को नहीं बल्कि संस्कारों में आ रही कमी को जिम्मेदार मानती है। उनका कहना है कि सामाजिक मूल्यों में गिरावट आ रही है और अपराधियों में सजा का डर ही नहीं रहा है।
उनका कहना है, "प्रदेश सरकार की मंशा साफ है और वह लड़कियों के कल्याण के लिए काम कर रही है। आज जरूरत इस बात की है कि समाज और जनप्रतिनिधि इस कोशिश में साथ दें।" उन्होने कहा कि आज प्रदेश की महिलाओं और लड़कियों मे जागृति आई है यही कारण है कि वे छेड़छाड़ और उत्पीड़न का विरोध कर शिकायतें दर्ज कराती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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