प्रवासी भारतीय सम्मेलन में नस्लभेद का मसला उठाएंगे मलेशियाई हिंदू

मलेशिया की ह्यूमन राइट्स पार्टी के महासचिव पी. उदयकुमार यहां 7-9 जनवरी तक चलने वाले प्रवासी भारतीय दिवस (पीबीडी) 2010 में शिरकत करने तथा मलेशिया में भारतीय मूल के लोगों के साथ होने वाले कथित मानवाधिकार उल्लंघन का मसला उठाने के लिए समर्थन हासिल करने यहां आए हैं। वह स्वयं भी मलेशिया में रहने वाले भारतीयों की पांचवीं पीढ़ी से ताल्लुक रखते हैं।

मलेशिया की दो करोड़ 70 लाख की आबादी में आठ फीसदी भारत वंशी हैं। इनमें से ज्यादातर तमिलनाडु के रहने वाले हैं जिन्हें ब्रिटिश उपनिवेशवादी शासक रबड़ की खेती के लिए अपने साथ मलेशिया ले गए थे।

49 वर्षीय उदयकुमार ने आईएएनएस को बताया, "वहां मानवाधिकारों के हनन की पराकाष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2007 में मलेशियाई भारतीयों की एक रैली का नेतृत्व करने के कारण वकीलों के एक समूह को बिना मुकदमा चलाए करीब डेढ़ साल तक बंदी बनाकर रखा गया। ये मलेशियाई भारतीय वहां मंदिर ढहाए जाने और अपने खिलाफ बढ़ती जातीय हिंसा का विरोध कर रहे थे।"

'नस्लीय सफाया' शब्द का इस्तेमाल करने के कारण उदयकुमार को राजद्रोह के आरोप में मेलेशियाई जेल में 514 दिन बिताने पड़े थे। उन्होंने बताया, "अमानवीय आंतरिक सुरक्षा अधिनियम के तहत बिना किसी मुकदमे के मुझे जेल में डाल दिया गया। मुझे बिना किसी मुकदमे के 514 दिन बाद रिहा किया गया।"

उन्होंने कहा, "मलेशिया लौटने पर संभवत: इस बार फिर मुझे राजद्रोह के आरोप में तीन साल के लिए जेल में ठूंस दिया जाए। महज इसलिए क्योंकि मैं विभिन्न सार्वजनिक मंचों मलेशियाई भारतीयों के नस्लीय सफाये का मसला उठा रहा हूं।"

ह्यूमन राइट्स पार्टी ऑफ मलेशिया द्वारा तैयार की गई मलेशिया में मानवाधिकार उल्लंघन से संबद्ध एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां करीब 20 लाख भारतीय हैं। यह रिपोर्ट उदयकुमार और उनके साथियों ने तैयार करवाई है जिनमें अधिकांश वकील हैं।

उदयकुमार ने कहा, "हमारे पास दस्तावेजी सबूत, तस्वीरें और आंकड़े हैं जिनसे यह साबित होता है मलेशियाई भारतीय भीषण मानवाधिकार उल्लंघन का सामना कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि पीबीडी 2010 के दौरान वह अपनी रिपोर्ट "मलेशियन इंडियन माइनॉरिटी एंड ह्यूमन राइट्स" पेश करने की कोशिश करेंगे।

इस 59 पृष्ठीय रिपोर्ट में मलेशियाई भारतीयों के साथ होने वाली मानवाधिकार उल्लंघन की कथित घटनाओं का ब्यौरा दिया गया है। यह रिपोर्ट शिक्षा, बुनियादी नागरिक अधिकार, गरीबी, आवास, कारोबार तथा विनियमित व्यवसायों के लिए लाइसेंस और परमिट तथा सरकारी कोष आवंटन जैसी 15 श्रेणियों में विभक्त है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि युनाइटेड मलय नेशनल आर्गेनाइजेशन पार्टी की अगुवाई वाली मलेशिया की वर्तमान गठबंधन सरकार एक नस्लभेदी, धार्मिक उग्रवाद और श्रेष्ठावादी शासन चला रही है। बहुत से नीतियों के माध्यम से मलेशियाई भारतीयों के एक बड़े तबके को मलेशिया के विकास की मुख्यधारा से अलग रखा गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय मूल के लोगों को व्यवस्थित रूप से समान अवसरों से वंचित रखा जा रहा है जिसकी वजह से करीब 70 फीसदी मलेशियाई भारतीय बेहद गरीबी में जी रहे हैं। रिपोर्ट में बहुत से मंदिरों, कब्रिस्तानों और भारतीय मूल के लोगों की बस्तियों को ढहाने का ब्यौरा दिया गया है। इनमें से अधिकाश घटनाएं विभिन्न मलेशियाई समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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