कल्याण सिंह ने नई पार्टी बनाई

रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने अपने 77वें जन्म दिन पर जन क्रांति नाम से एक नई पार्टी बनाने की घोषणा की है. उन्होंने अपने बेटे राजबीर सिंह को पार्टी का अध्यक्ष बनाया है. कल्याण सिंह ने लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस करके नई पार्टी के गठन की जानकारी दी. 1999 में भारतीय जनता पार्टी छोड़ने के बाद वह दूसरी बार अपनी नई पार्टी बना रहे हैं.
इस बीच वह एक बार भारतीय जनता पार्टी में वापस गए थे और दो बार उन्होंने मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी से हाथ मिलाया. हाल ही में मुलायम सिंह के साथ खटपट होने के बाद उनके भाजपा में वापस लौटने की अटकलें लगाई जा रही थीं. लेकिन आज अपने जन्मदिन पर नई पार्टी घोषित करके उन्होंने इन अटकलों को विराम दे दिया.
कल्याण सिंह ने बताया कि वह अपने बेटे राजबीर और विधायक बहू प्रेमलता के साथ बुधवार को अयोध्या में विवादित राम मंदिर के दर्शन करने जाएँगे. वर्ष 1992 में उनके मुख्यमंत्री रहते विवादित बाबरी मस्जिद को तोड़कर यह मंदिर बनाया गया था.
'तलाक हो गया'
बाद में राजबीर सिंह ने कहा कि प्रखर हिंदुत्ववाद और प्रखर राष्ट्रवाद जन क्रांति पार्टी की विचारधारा होगी. गाँव, गरीब किसान और झुग्गी-झोपड़ी का उत्थान उनका मुख्य कार्यक्रम होगा. मुलायम सिंह का साथ छोड़ने के बारे में राजबीर ने कहा, 'लव मैरेज हुई थी, तलाक हो गया.'
भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रवक्ता ह्रदय नारायण दीक्षित ने कहा, "पार्टी बनाना हर आदमी का अधिकार है." साथ ही उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भाजपा छोड़कर अलग पार्टी बनाने वाला कोई नेता अब तक सफल नही हुआ.
कल्याण सिंह ने नई पार्टी का ऐलान किया तो उनके माल एवेन्यू वाले घर पर राज्य भर से लगभग तीन सौ समर्थक मौजूद थे, लेकिन इनमे कोई बड़ा या जाना माना नाम नहीं था. वर्ष 1999 में कल्याण सिंह ने जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से झगड़ा करके नई पार्टी बनाई थी तब उन्होंने राम मंदिर मुद्दे को तिलांजलि दे दी थी.
वर्ष 2007 का विधान सभा चुनाव बीजेपी उनके नेतृत्व में लड़ी. फिर उन्होंने मुलायम सिंह से हाथ मिलाया और समाजवादी पार्टी के समर्थन से 2009 में एटा से लोक सभा चुनाव जीता. इसलिए प्रेक्षकों का कहना है कि कल्याण सिंह का दोबारा हिंदू नेता बनना मुश्किल होगा. उनका कहना है कि कल्याण सिंह अपना भला भले न कर पाएँ वह लोध और पिछड़े वर्गों के वोट काटकर मुलायम को नुक़सान और मायावती को फ़ायदा पहुंचा सकते हैं.












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