22 एमए, 5 पीएचडी और 3 डी-लिट डिग्रियों के बाद भी अध्ययन जारी
लखनऊ, 27 दिसम्बर (आईएएनएस)। उम्र के 65वें पड़ाव पर भी उत्तर प्रदेश निवासी आर.के.राय छात्र हैं, जिनके पास अभी 22 विषयों में स्नातकोत्तर (एमए), 5 विषयों में पीएचडी और 3 विषयों में डी-लिट की डिग्रियां हैं।
प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद निवासी राय अपनी समृद्ध शैक्षणकि पृष्ठभूमि और पढ़ाई के प्रति अपने रुझान से सबको आश्चर्यचकित करते हैं।
राय ने प्राचीन इतिहास, आधुनिक इतिहास, राजनीति शास्त्र, भूगोल, हिंदी, समाजशास्त्र, शिक्षाशास्त्र और संस्कृत जैसे 22 अलग-अलग विषयों में स्नातकोत्तर शिक्षा हासिल की है। शिक्षाशास्त्र, प्राचीन इतिहास, हिंदी, वाणिज्य और दशर्नशास्त्र में उन्होंने पीएचडी जबकि हिंदी, संस्कृत और प्राकृत विषयों में उन्होंने डी-लिट की डिग्री हासिल की।
राय ने आईएएनएस से कहा, "सीखने की कोई उम्र नहीं होती। जीवन में सीखने की प्रक्रिया निरंतर जारी रहती है। मैंने कोई अनोखा काम नहीं किया है। जिस आदमी में सीखने की लगन हो वह कुछ भी कर सकता है।"
राय बिहार के मगध विश्वविद्यालय से प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। फिलहाल वह अपनी 23वीं स्नातकोत्तर डिग्री पाने के लिए देश के प्राचीन विश्वविद्यालयों में से एक वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से ज्योतिषशास्त्र में एम.ए कर रहे हैं।
राय ने अपनी ज्यादातर डिग्रियां पंजाब विश्वविद्यालय, कानपुर विश्वविद्यालय, वीर कुमार सिंह विश्वविद्यालय आरा, बिहार, और पटना विश्वविद्यालय से अर्जित की हैं। अपने स्नातकोत्तर विषयों में राय ने ज्यादातर प्रथम श्रेणी अंक प्राप्त किए। इस शैक्षणिक पृष्ठभूमि का श्रेय वह मगध विश्वविद्यालय के अपने सहयोगी प्रोफेसरों को देते हैं।
राय कहते हैं, "मेरे सहयोगी प्रोफेसर मेरी जिज्ञासाओं और मेरे सवालों का उत्तर उसी तरह से देते थे, जैसे कोई अध्यापक ट्यूशन में छात्रों को देता है। परीक्षा से पहले मुझ्झे वह ज्यादा अंक पाने के टिप्स देते थे।"
राय फिलहाल बुलंदशहर स्थित काका स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय में प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। यहां पर वह नियमित कक्षाएं लेते हैं। वह कहते, "मैं हमेशा पढ़ाई से जुड़ा रहना चाहता हूं। इसलिए कोशिश करता हूं कि कम से कम रोज एक कक्षा लेकर छात्रों से बात करूं।"
गाजीपुर और बुलंदशहर दोनों जगह राय 'मास्टर साहब' के नाम से मशहूर हैं। छुट्टियों में पैतृक घर पहुंचने पर राय के घर पर छात्रों की भीड़ लग जाती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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