जलवायु पर निराशा उचित: ओबामा

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि यदि लोग कोपेनहेगन में हुए जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के नतीजों से निराश हैं तो यह उचित ही है.
लेकिन उन्होंने एक टेलीविज़न साक्षात्कार में कहा है कि सम्मेलन को पूरी तरह विफल होने से बचा लिया गया है और एक ऐसा समझौता कर लिया गया है जो बाध्यकारी नहीं है. उनका कहना था कि कुछ नहीं होने से यह फिर भी बेहतर है. कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए क़ानूनी रुप से बाध्यकारी समझौता न होने के लिए अमरीका और चीन की तीखी निंदा की गई है.
लातिनी अमरीका के कई वामपंथी नेताओं, जिन्होंने इस समझौते की पुष्टि करने से इनकार कर दिया है, ने बराक ओबामा पर आरोप लगाया है कि वे बेहद अक्खड़ हैं. चीन ने भी इन आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त किया है और कहा है ये आरोप एक राजनीतिक योजना के तहत वो देश लगा रहे हैं जो अपनी बात मनवाना चाहते थे.
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन मामलों के प्रमुख यो डी बोर ने इन देशों से कहा है कि वे शिकवा-शिकायत करना बंद करें और जो समझौता हुआ है उस पर काम करना शुरु करें जिससे कि अगले साल मैक्सिको में होने वाली बैठक में बेहतर नतीजे मिल सकें.
उल्लेखनीय है कि कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन 28 देशों के बीच एक समझौते के साथ ख़त्म हुआ था जिसे अमरीका के नेतृत्व में तैयार किया गया था. इस समझौते के तहत विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन की समस्याओं से निपटने के लिए अगले तीन साल में 30 अरब डॉलर दिए जाएँगे.












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