राजनीतिक निद्रा से जगाने के लिए 'जागते रहो' अभियान

इस अभियान का मकसद 21 फरवरी को होने वाले 'बृहत बेंगलुरू महानगर पालिका' (बीबीएमपी) के स्थानी चुनावों में मतदान के लिए लोगों को प्रेरित करना है।

तीन साल तक बिना किसी परिषद के रहने वाले बेंगलुरू में अब एक परिषद का चुनाव होगा। बीबीएमपी का अंतिम चुनाव साल 2001 में हुआ था।

बेंगलुरू के एक स्वयंसेवी संगठन (एनजीओ) 'जनाग्रह' ने मंगलवार से इस अभियान की शुरुआत की है। पांच वर्षो के अंतराल में देश के 10 शहरों में यह अभियान चलाया जाएगा।

'जागते रहो!' की राष्ट्रीय संयोजक जैसमीन शाह ने आईएएनएस से कहा, "शहरी मतदाताओं की कम संख्या न केवल मतदाताओं की उदासीनता बल्कि जटिल प्रक्रियाओं और मतदाता सूची की खामियों को प्रकट करती है। जागते रहो! अभियान के तहत इन सभी पक्षों में बदलाव की कोशिश की जाएगी।"

शाह ने कहा कि अभियान के तहत 5,000 स्वयंसेवकों की 'क्षेत्रीय मतदाता मित्रों' के रूप में नियुक्ति की जाएगी। जो मतदान के मुद्दों पर एक पड़ोसी की तरह मदद करेंगे। वे मतदाताओं के नए सिरे से नामांकन में भी मदद करेंगे।

अभियान के आयोजक निचले स्तर तक पहुंचकर नागरिकों को स्थानीय चुनावों सहित लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।

'जनाग्रह' ने इससे पहले 'टाटा टी' के साथ राष्ट्रीय स्तर पर 35 शहरों में मतदाता पंजीकरण अभियान 'जागते रहो!' शुरू किया था। इस साल अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनाव से पहले इस अभियान की शुरुआत की गई थी।

'जनाग्रह' के सह-संस्थापक रमेश रामानाथन का कहना है कि उनकी संस्था बीबीएमपी चुनावों में मतदाताओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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