उल्फा कमांडर परेश बरुआ को कोई माफी देने को तैयार नहीं
सैयद जरीर हुसैन
धेमाजी (असम), 15 दिसम्बर (आईएएनएस)। युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के कमांडर परेश बरुआ ने भले ही माफी मांग ली है लेकिन आतंकवादी हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों और उल्फा के पूर्व सदस्यों में से कोई भी उसे माफ करने को तैयार नहीं हैं।
एक बम विस्फोट में स्कूल जाने वाली अपनी दो पुत्रियों को गंवाने वाली गृहिणी लोबिता सैकिया ने आईएएनएस से कहा, "मैं नहीं समझती कि उल्फा सदस्यों को माफ किया जा सकता है और उनको कड़ा दंड मिलना चाहिए। उनके गुनाहों को माफ करने का केवल एक ही रास्ता है कि वे शांति वार्ता में शामिल हों और हिंसा को छोडें़।"
लोबिता की दो पुत्रियां अरुणा और रूपा 15 अगस्त 2005 को धेमाजी में स्वतंत्रता दिवस परेड मैदान पर हुए शक्तिशाली बम विस्फोट में मारे गए 14 लोगों में शामिल थीं।
उल्फा कमांडर ने रविवार को एक ईमेल भेजकर धेमाजी विस्फोट के लिए सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगी थी।
विस्फोट में अपनी युवा पत्नी गंवाने वाले भास्कर गोगोई ने भी कहा कि उस घटना को भुलाना कठिन है लेकिन असम के हित में यदि वे शांति वार्ता में शामिल होते हैं तो उनको क्षमा किया जा सकता है।
अपने बयान में बरुआ ने कहा कि उनके कार्यकर्ताओं ने विस्फोट से पहले अनुमति नहीं ली थी।
शांति वार्ता समर्थक उल्फा के धड़े के नेता मृणाल हजारिका ने इस पर कठोर प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए कहा, "मेरे विचार से परेश बरुआ का दिमागी संतुलन गड़बडा गया है। वह करीब पांच साल तक चुप क्यों रहा? उसने नेतृत्व की बिना अनुमति के विस्फोट करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।"
हजारिका करीब उल्फा 150 सदस्यों का नेता है, जो जुलाई 2008 में शांति वार्ता में शामिल हुए। इन सभी का संबंध अल्फा और चार्ली कंपनियों से है।
हजारिका ने कहा कि परुआ दिन प्रतिदिन अलग-थलग पड़ता जा रहा है और आज वह केवल एक कागजी शेर है। वह मीडिया का उपयोग कर अपनी उपस्थिति जताने के प्रयास में है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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