बिहार में विलय संबंधी नीतीश के बयान से झारखण्ड में नाराजगी

छोटे राज्यों की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए नीतीश कुमार ने कहा था कि राज्यों के पुनर्गठन का मतलब केवल वर्तमान राज्यों का विभाजन ही नहीं है बल्कि इसका मतलब एक राज्य को दूसरे राज्य में मिलाना भी हो सकता है।

जनता दल (युनाइटेड) के नीतीश कुमार नेता का कहना था, "बिहार के पुनर्गठन की एक संभावना यह भी है कि पूर्वाचल (उत्तर प्रदेश) और झारखण्ड को बिहार के साथ मिला दिया जाए।"

नवंबर 2000 में बिहार के विभाजन से झारखण्ड का गठन हुआ था। उस समय नीतीश कुमार केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री थे।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जोर दिया है कि नीतीश की बात का गलत अर्थ निकाला गया है।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, "नीतीश का मतलब है कि नए राज्यों के गठन से पहले उनके सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अन्य व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन करना आवश्यक है।"

दूसरी ओर झारखण्ड के पहले मुख्यमंत्री और अब झारखण्ड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का कहना है, "नीतीश कुमार का असली चेहरा सामने आ गया है। उनके वक्तव्य में राज्य के लोगों के प्रति उनकी भावनाएं प्रदर्शित होती हैं।"

राज्य में कांग्रेस ने भी नीतीश के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है। झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीप बालमुचु का कहना है, "नीतीश का बयान राज्य के लोगों की भावनाओं के खिलाफ है। यह उनकी हताशा का परिचायक है क्योंकि कांग्रेस राज्य में अगली सरकार बनाने की स्थिति में है।"

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने इस बयान पर आश्चर्य जताया है। झामुमो के राज्यसभा सांसद हेमंत सोरेन ने आईएएनएस से कहा, "बिहार की राजनीति से प्रभावित होकर यह बयान दिया गया है। नीतीश को छोटे राज्यों के गठन के पीछे का मकसद समझना चाहिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। ।

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