'वैकल्पिक' जलवायु सम्मेलन में पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी (लीड-1)
एक स्वयंसेवी संगठन (एनजीओ) 'क्लाइमेट जस्टिस एक्शन' द्वारा आयोजित एक रातभर चलने वाली वार्ता के समय यह मुठभेड़ हुई। आयोजकों का दावा है कि मध्यरात्रि में पुलिस ने वार्ता स्थल के आसपास आंसू गैस के कनस्तर रख दिए थे।
कुछ वक्ता 7 से 18 दिसम्बर के बीच आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के कड़े विरोधी थे। कई स्वयंसेवी संगठन लोगों से जलवायु चुनौती से खुद निपटने के लिए कहने के बजाए इस 'वैकल्पिक' सम्मेलन में शामिल हुए थे।
पुलिस का कहना है कि पांच प्रदर्शनकारी अब भी हिरासत में हैं और उन पर पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का यह भी कहना है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा शहर के एक स्वतंत्र व स्वायत्त क्षेत्र क्रिस्टिएनिया के सामने की बाड़ में आग लगा देने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया।
संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से पहले डेनमार्क ने एक विशेष कानून बनाया है, जो पुलिस को संदिग्धों को बिना किसी आरोप के 12 घंटे तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है।
चर्चा सुनने के लिए पहुंचे क्रिस्टिएनिया के निवासी ऑस्कर ड्रेस्लिलंग का कहना है, "इस हमले का कोई कारण नहीं था। वे सोचते हैं कि जब हम पार्टी कर रहे थे उस समय उनके हमला कहने से हम डर जाएंगे और इस सप्ताह सड़कों पर नहीं निकलेंगे, लेकिन हम इतना आसानी से मानने वाले नहीं हैं।"
पुलिस ने शनिवार से अब तक जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का विरोध कर रहे करीब 1,300 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है। उनमें से ज्यादातर को रिहा कर दिया गया है।
क्रिस्टिएनिया एक पूर्व सैन्य केंद्र है, जो 1970 के दशक के बाद से डेनमार्क की राजधानी में वैकल्पिक आंदोलन का एक ठिकाना रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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