तेलंगाना पर मजबूर हुई केंद्र सरकार

चिदंबरम ने अपनी मजबूरी बयां भी कर दी है। उन्होंने कहा कि पृथक तेलंगाना राज्य की मांग के मसले पर सरकार के पास संसद के बाहर सार्वजनिक बयान देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने यह बात राज्यसभा में कही।
राज्यभा में गृहमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जब बुधवार को इस मसले को सदन में उठाया तो सरकार उत्तर देने की स्थिति में नहीं थी, क्योंकि इस पर मंत्रणा चल रही थी। मंत्रणा देर रात तक पूरी हुई और हम इस पर बयान देने में विलंब नहीं कर सकते थे।
विपक्ष ने उठाए कई सवाल
चिदंबरम के इस बयान से पहले भाजपा नेता एम वेंकैया नायडू ने पूछा कि, "गृह मंत्री बुधवार को सदन में मौजूद थे और उन्हें अलग राज्य के गठन के बारे में बाहर बयान देने के बजाय पहले सदन को विश्वास में ले लेना चाहिए था।"
सदन में हंगामे के बीच सभापति हामिद अंसारी ने कहा, "सदस्य संविधान के प्रति जागरुक हैं। इस सदन को विश्वास में लिए बिना कुछ भी नहीं किया जाएगा।" हंगामा जारी रहने पर सभापति ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
उल्लेखनीय है कि तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख के. चंद्रशेखर राव पृथक राज्य की मांग को लेकर बीते 11 दिनों से आमरण अनशन पर थे। इस दबाव की वजह से केंद्र सरकार ने बुधवार रात तेलंगाना के गठन पर सहमति व्यक्त कर दी।












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