चीन आपसी चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता बरते : भारत (लीड-1)
विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने चीन के मुद्दे पर लोकसभा में हुई चर्चा पर अपने जवाब में कहा, "दोनों पक्षों को एक-दूसरे की चिंताओं, आकांक्षाओं और भावनाओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।"
कृष्णा ने द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक प्रगतिशील दृष्टिकोण की वकालत की और एक दूसरे की स्थितियों की समझ पर आधारित आपसी सम्मान और विश्वास के माहौल में संबंधों को व्यापक बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
सीमा विवाद पर बातचीत को एक जटिल और समय खपाऊ प्रक्रिया करार देते हुए कृष्णा ने जोर देकर कहा कि इस मुद्दे को दोनों देशों के बीच व्यापार जैसे क्षेत्रों में सक्रिय सहयोग को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
कृष्णा ने कहा कि चीनी विदेश मंत्री यांग जीची ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि बीजिंग शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के सिद्धांत पर अमल करेगा।
कृष्णा की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब विपक्ष ने लद्दाख और अरूणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ की खबरों के बारे में सरकार पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुरली मनोहर जोशी ने सरकार से कहा कि वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे प्रभावशाली देशों के साथ संबंध बनाए जो भारत और चीन के विवाद की स्थिति में मदद कर सकें।
लोकसभा में भारत-चीन संबंध पर विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत करते हुए जोशी ने कहा, "पिछले दो-तीन वर्षो में हमने चीन के आक्रामक रुख देखे हैं। परमाणु आपूर्ति समूह के मसले पर चीन ने भारत का पूरी तरह से विरोध किया था।"
जोशी ने कहा, "लद्दाख के लोग कह रहे हैं कि चीन घुसपैठ कर रहा है लेकिन आप क्यों देश को गुमराह कर रहे हैं। मुझे ऐसा लगता है कि हम लोग 1962 की स्थिति में हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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