पौधों में संतान का अक्स देखते हैं भैयाराम

बांदा, 6 दिसम्बर (आईएएनएस)। जिंदगी कभी रुकती नहीं और लगनशील इंसान के लिये तो बिल्कुल भी नहीं। बुंदेलखण्ड के चित्रकूट जनपद के भरतकूप के भैयाराम यादव ऐसे ही इंसान हैं, जिन्होंने नियति से हार न मानते हुए जीने का वह रास्ता निकाला जो पर्यावरण सुधारने में योगदान दे रहा है।

भैयाराम यादव (40 वर्ष) ने अपनी जिन्दगी का लक्ष्य वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों की देखभाल को बना रखा है। गांव के बीस फर्लांग दूर भारतपुर पहाड़ की तलहटी के किनारे वन विभाग ने पौध रोपण योजना के तहत पौधे रोपे थे। भैयाराम ने इन पौधों को जिंदा रखना अपना लक्ष्य बना लिया। पिछले डेढ़ साल से वह इनको सींच रहे हैं। सुबह छह बजे वह इन पौधों के पास पहुंचते हैं और शाम ढलने तक वहीं रहते हैं। करीब 300 मीटर दूर नल से कंधे पर पानी ढोकर लाना उनकी दिनचर्या है।

भैयाराम ने भारतपुर पहाड़ का सीना चीरकर करीब एक किलोमीटर तक का सुगम रास्ता बना दिया, जहां से पानी के टैंकर आते हैं। रास्ता बनाने में भैयाराम को एक साल लगा और ग्रामीणों ने भी उनकी मदद की।

वह पौधों को कीटों से बचाने के लिए कीटनाशकों का भी छिड़काव करते हैं। भैयाराम की इच्छा है कि वन विभाग इन पौधों की सुरक्षा के लिये तार की बाड़ लगवाने के साथ ही कहीं से पानी का प्रबंध करवा दे।

भैयाराम का विवाह 25 वर्ष की उम्र में हुआ था। विवाह के तीन साल बाद पत्नी चुन्नी देवी की मौत हो गई। इसे नियति का खेल मान भैयाराम ने इकलौते पुत्र गंगादीन के लालन-पालन को जिन्दगी का ध्येय बना लिया। लेकिन दो साल बाद ही गंगादीन भी चल बसा।

भैयाराम ने किराने की दुकान खोली लेकिन मन नहीं लगा। बढ़ई के पेशे में हाथ अजमाया तो सफल नहीं हुए। इसके बाद भैयाराम ने अपने हिस्से की डेढ़ बीघा जमीन घरवालों को सौंप दी और शेष जीवन पेड़-पौधों के साथ बिताने की प्रतिज्ञा कर ली। उन्हें नन्हें पौधों में संतान का अक्स दिखने लगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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