जलवायु परिवर्तन पर भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं : सरकार (लीड-1)
रमेश ने शून्य काल के दौरान सदन में कहा, "देश के राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है। कार्बन उत्सर्जन में 25 प्रतिशत कटौती की घोषणा एक तरफा है और यह अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं की गई है। यह घोषणा पश्चिमी देशों से कार्बन उत्सर्जन में अधिक कटौती करने की हमारी मांग को और मजबूती प्रदान करेगा।"
लेकिन रमेश के इस जवाब से विपक्ष के नेता अरुण जेटली संतुष्ट नहीं हो पाए, जिन्होंने सदन में इस मुद्दे को उठाया था।
जेटली ने कहा, "मैं इस उत्तर से पूरी तरह असंतुष्ट हूं और मैं सदन का बहिगर्मन कर रहा हूं।"
इसके बाद जेटली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों के साथ सदन से बाहर चले गए। इसके बाद वामपंथी, समाजवादी पार्टी और एआईएडीएमके सहित विपक्ष के बाकी सदस्य भी सदन से उठ कर बाहर चले गए।
रमेश ने सदन को यह भी याद दिलाया कि योजना आयोग द्वारा की गई अर्थव्यवस्था की अर्ध वार्षिक समीक्षा में भी पाया गया है कि कार्बन उत्सर्जन में 25 प्रतिशत की कटौती से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
जलवायु परिवर्तन सम्मेलन पर भारत के रुख के बारे में सांसदों के सवालों के जवाब में रमेश ने कहा, "मैं गुरुवार को कोपेनहेगन जाऊंगा। वहां जाने से पहले संसद में वापस आकर सभी सवालों का जवाब दूंगा।"
रमेश ने कहा कि भारत, चीन और ब्राजील के पास कोपेनहेगन सम्मेलन के दौरान ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के मुद्दे पर बातचीत के लिए एक बुनियादी मसौदा है।
रमेश ने कहा, "भारत, चीन और रूस के पास मूल मसौदा है। मेरे पास इस मसौदे की एक प्रति है ..बातचीत की रूपरेखा तय करने संबंधी इस मूल मसौदे की प्रति।"
कोपेनहेगन में 7-18 दिसम्बर तक आयोजित हो रहे सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल होंगे। सम्मेलन में धरती के बढ़ते तापमान के मसले पर एक नए समझौते पर हस्ताक्षर की उम्मीद है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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