आयुर्वेद से आकर्षित हो रहा है लिथुआनिया
नई दिल्ली, 7 दिसम्बर (आईएएनएस)। अपने पड़ोसी रूसी लोगों की तरह ही अब लिथुआनिया के लोग भी भारत आ रहे हैं। गोवा के समुद्र तटों के साथ अब आयुर्वेद भी उन्हें आकर्षित कर रहा है।
लिथुआनिया में भारत के महावाणिज्यिक दूत राजिंदर कुमार चौधरी कहते हैं कि पिछले एक साल में 7,000 से अधिक लिथुआनियावासियों ने भारत की यात्रा की है। उन्होंने कहा कि लिथुआनियावासियों के बीच यहां का आयुर्वेद सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है।
लिथुआनिया भारत में प्रचलित आयुर्वेदिक उपचार पद्धति से अनभिज्ञ नहीं है। आयुर्वेद की प्रसिद्धि के चलते वहां कई आयुर्वेदिक उपचार केंद्र शुरू हो गए हैं।
चौधरी ने आईएएनएस से कहा, "लिथुआनिया में आयुर्वेदिक उपचार की बहुत अधिक मांग है। यद्यपि, वहां के लोग अब उसी जगह पर आयुर्वेदिक उपचार और चिकित्सा लेना चाहते हैं, जहां इसका विकास हुआ है। इसलिए वे इसका अनुभव लेने के लिए केरल की यात्रा कर रहे हैं।"
इससे पहले ज्यादातर लिथुआनियावासी गोवा से आकर्षित होकर भारत आते थे।
चौधरी ने कहा, "गोवा और अब केरल लिथुआनियावासियों को आकर्षित कर रहा है। पिछले एक साल में करीब 7,000 लिथुआनियावासियों ने भारत की यात्रा की है। हालांकि यह बहुत बड़ी संख्या नहीं है लेकिन इससे पहले 300-400 लिथुआनियावासी पर्यटक ही यहां आते थे और यह एक बहुत छोटा देश है, इसलिए इस संख्या को बड़ा माना जा रहा है।"
लिथुआनिया की आबादी 35 लाख है। यह भूतपूर्व सोवियत गणराज्य का हिस्सा था, जिसे 1990 में आजादी मिली थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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