कैगा संयंत्र के 50 कर्मचारी संदेह के दायरे में (लीड-2)
कैगा संयंत्र के निदेशक जे.पी.गुप्ता ने संवाददाताओं को बताया, "मैंने राज्य स्तरीय और केंद्रीय जांच एजेंसियों को उन व्यक्तियों के नाम दे दिया है, जो 24 नवंबर को घटना वाले दिन रिएक्टर की पहली इकाई में उपस्थित थे। जांच एजेंसियां इस घटना को अंजाम देने वाले व्यक्ति की पहचान करने के लिए जांच में जुटी हुई हैं।"
सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी, भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के साथ ही कैगा परमाणु दल और राज्य पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
गुप्ता ने कहा, "घटना वाले शिफ्ट के दौरान जो कर्मचारी काम पर थे, हमें उनकी पृष्ठभूमि की जानकारी है। हमारे पास उनके रिकॉर्ड बायोमीट्रिक्स रूप में और फोटो पहचान पत्र के रूप में मौजूद हैं। अब यह जांचकर्ताओं पर निर्भर करता है कि वे संदिग्ध की पहचान करें।"
गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि ट्राइटियम का प्रदूषण घातक नहीं है और प्रभावित कर्मचारी खतरनाक स्तर पर विकिरण से प्रभावित नहीं हुए हैं।
गुप्ता ने कहा, "प्रभावित कर्मचारियों में असामान्य लक्षण दिखाई देने के तत्काल बाद हमने पेय जल में मिले प्रदूषण को बाहर निकालने के लिए कर्मचारियों को दवाइयां दी।"
दूसरी ओर संयंत्र के एक अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर आईएएनएस को बताया कि पानी में रेडियोधर्मी पदार्थ ट्राइटियम मिलाने वाले व्यक्ति को पकड़ना और भी कठिन हो गया है।
अधिकारी ने कहा कि संयंत्र में 1,689 स्थायी और लगभग 5,000 अनुबंधित कर्मचारी हैं। अधिकारी ने कहा कि संयंत्र में अनुंबध के आधार पर दो श्रेणियों में कर्मचारी काम करते हैं।
परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल कोकोदकर ने भी कहा है कि इस घटना में अंदरूनी व्यक्ति का हाथ हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि ट्राइटियम से कैंसर भी हो सकता है। बीमार पड़ने वाले कर्मचारी संयंत्र की यूनिट एक से जुड़े हैं।
एनपीसीआईएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एस.के.जैन ने रविवार को कहा था कि मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
जैन ने कहा था कि वार्षिक रखरखाव के लिए यूनिट एक 20 अक्टूबर से बंद था। रखरखाव के कार्य के लिए 500 कर्मचारी लगे हुए थे, जिनमें अधिकांश अनुबंधित थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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