जैसलमेर के करीब सुखोई गिरा, दोनों पायलट सुरक्षित (लीड-1)
वायु सेना के बेड़े में शामिल रूस निर्मित इस बेहद उन्नत विमान में सवार पायलट और सहयोगी पायलट समय रहते सीट इजेक्शन प्रणाली की मदद से अपनी जान बचाने में सफल रहे।
सुखोई विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। उसने उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित वायु सेना अड्डे से उड़ान भरी थी। वायुसेना के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "अभ्यास के दौरान सुखोई दुर्घटनाग्रस्त हुआ। दोनों पायलट सुरक्षित हैं।" अधिकारी ने इससे अधिक जानकारी देने से इंकार कर दिया।
भारत में सुखोई के दुर्घटनाग्रस्त होने की यह दूसरी घटना है। 12 वर्ष पहले वायु सेना के बेड़े में शामिल किए गए इस विमान की भारत में पहली दुर्घटना इस वर्ष अप्रैल में राजस्थान में ही हुई थी।
अप्रैल में हुई दुर्घटना इसके अत्याधुनिक फ्लाई-वायर-एअर प्रणाली में तकनीकी खराबी के कारण हुई थी। उस घटना में पायलट विंग कमांडर एस.वी. मुंजे और सहायक पायलट विंग कमांडर पी.एस. नाराह बाहर निकलने में सफल रहे थे लेकिन आसमान से गिर रहे विमान के मलबे से लगी चोट के कारण नाराह की मौत हो गई थी।
सुखोई को 1996 में वायुसेना में शामिल किया गया था। अभी भारत में इसकी कुल संख्या 98 है और इसे 2015 तक 230 तक बढ़ाने की योजना है। सुखोई-30 ने एक शानदार युद्धक विमान के तौर पर ब्रिटेन, अमेरिका और फ्रांस की वायुसेनाओं में विशेष स्थान कायम किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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