'नौसेना की परंपराओं में अहम भूमिका निभाती हैं महिलाएं'
नई दिल्ली, 30 नवंबर (आईएएनएस)। युद्धपोतों के चालक दल में महिलाओं को भले ही न शरीक किया जाए लेकिन भारतीय नौसेना परंपराओं में वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि युद्धपोतों के रस्मी जलावतरण का गौरव भी महिलाओं को ही मिलता है।
आगामी चार दिसंबर को नौसेना दिवस है। इससे पहले नौसेना के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि फेमिलीज डे के मौके पर सभी अधिकारियों को अपनी पत्नियों के साथ युद्धपोत पर आने की इजाजत होती है।
अधिकारी ने कहा, "नौसेना में महिलाओं का सबसे अधिक सम्मान होता है। जब महिलाएं किसी जहाज पर सवार होती हैं तो सभी उन्हें सलामी देते हैं। यह परंपरा सभी महिलाओं के साथ उनके स्वयं के या उनके पतियों के रुतबे का ध्यान किए बगैर निभाई जाती है।"
पोतों का जलावतरण और नामकरण पारंपरिक रूप से किसी महिला द्वारा ही किया जाता है। आमतौर पर यह गौरव मुख्य अतिथि की पत्नी को हासिल होता है। महिला युद्धपोत का नामकरण करते हुए उसके और उस पर सवार होने वालों के सुखद भविष्य की कामना करती है। उसके बाद वह महिला पोत को सिंदूर लगाकर हाथ जोड़कर प्रार्थना करती है और नारियल फोड़ती है। इसके साथ ही पोत अपने सफर का आगाज करता है।
उल्लेखनीय है कि इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर ने नौसेना की पहली परमाणु पनडुब्बी का जलावतरण किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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