इंद्रधनुषी सपने बुन रहे हैं अपनी बीमारी से अनजान एचआईवी बच्चे (विश्व एड्स दिवस, 1 दिसंबर, पर विशेष)
हैदराबाद, 30 नवंबर (आईएएनएस)। कई दार्शनिकों ने अनभिज्ञता को सुखद करार दिया है और यह धारणा आंध्र प्रदेश के इन बच्चों के संदर्भ में सही मानी जा सकती है।
ये बच्चे बड़े होकर डाक्टर, इंजीनियर, पायलट और यहां तक कि धौनी की तरह धुरंधर क्रिकेटर बनना चाहते हैं, पर इस त्रासद सच से वाकिफ नहीं हैं कि वे एचआईवी पॉजिटिव हैं।
यहां से करीब 70 किलोमीटर दूर रंगा रेड्डी जिले के एक गांव में चौथी कक्षा में पढ़ने वाली वाई. संजू की आंखें रंगीन सपने बुनती हैं, पर इस बदनसीब मासूम को पता नहीं कि वह एचआईवी पॉजिटिव है।
बड़ा होकर वह क्या बनना चाहती है, यह पूछे जाने पर वह चहकते हुए कहती है, "मैं डाक्टर बनकर अपने गांव की सेवा करना चाहती हूं। जब मैं सात साल की थी, मेरी मां की मौत गई। मैं दूसरों को इसी तरह मरते देखना नहीं चाहती।"
दुबली-पतली संजू सवालों का उत्तर देने में बिल्कुल नहीं घबराती। एक गैर सरकारी संगठन के कार्यालय में दूसरे बच्चों के साथ बैठी संजू के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि नौ महीने पहले हुई। यह बीमारी उसके माता-पिता को पहले ही लील चुकी है।
संजू की तरह ही 11 वर्षीय कल्याण बड़े सपने देख रहा है। पांचवीं का यह छात्र बड़ा होकर एम.एस धौनी की तरह क्रिकेटर बनना चाहता है। अपने माता-पिता को खो चुका यह मासूम कहता है, "धौनी में मेरा पसंदीदा क्रिकेटर है। मैं हैदराबाद के लिए खेलना चाहता हूं।" वह और उसका एचआईवी पॉजिटिव भाई अपने चाचा के साथ रहते हैं।
इन मासूमों की मदद के लिए जेनेवा स्थित संगठन द ग्लोबल फंड आगे आया है। अकेले रंगारेड्डी जिले में यह संगठन ऐसे 492 बच्चों तक पहुंच चुका है। संगठन के प्रवक्ता नलिन मेहता कहते हैं, "हम इन बच्चों की शिक्षा में मदद दे रहे हैं। हम उनकी सेहत का भी ख्याल रख रहे हैं।" राज्य में कुल 8865 बच्चे इससे लाभान्वित हो रहे हैं।
(प्रभावित बच्चों की पहचान गुप्त रखने के लिए उनके असली नाम नहीं दिए गए हैं। )
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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