भारत बाधा नहीं बनेगा: सार्कोज़ी

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात के बाद कहा है कि भारत कभी भी कोपेनहेगन संधि के रास्ते में बाधा नहीं बनेगा.

राष्ट्रमंडल देशों के सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद राष्ट्रपति सार्कोज़ी ने प्रधानमंत्री सिंह से कहा है कि उन्हें कोपेनहेगन सम्मलेन में अवश्य शामिल होना चाहिए.

दिसंबर के पहले हफ़्ते में शुरु हो रहे कोपेनहेगन सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित करने के लिए एक नई संधि पर सहमति बनाने के प्रयास हो रहे हैं.

यह नई संधि क्योटो संधि का स्थान लेगी. लेकिन विकसित देशों और विकासशील देशों के बीच मतभेद होने की वजह से अभी तक कोई व्यापक सहमति नहीं बन सकी है.

पहले अमरीका और उसके बाद चीन ने 2020 तक कार्बन गैसों के उत्सर्जन में कटौती के लिए लक्ष्यों की घोषणा कर दी है, इसके बाद भारत पर दबाव है कि वह भी अपने लक्ष्यों की घोषणा करे.

त्रिनिदाद की राजधानी पोर्ट ऑफ़ स्पेन में राष्ट्रमंडल सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून, डेनमार्क के प्रधानमंत्री लार्स लोके रासमुसेन और फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी को विशेष रुप से आमंत्रित किया गया है.

लक्ष्य की घोषणा

समाचार एजेंसियों के अनुसार निकोला सार्कोज़ी और मनमोहन सिंह के बीच दोपहर को भोज के दौरान हुई चर्चा का मुख्य विषय जलवायु परिवर्तन और कोपेनहेगन सम्मेलन ही रहा.

इस चर्चा के बाद निकोला सार्कोज़ी ने जो कुछ कहा उसमें भारत का दृष्टिकोण झलक रहा था.

उन्होंने कहा, "कोपेनहेगन सम्मेलन एक अवसर है. यदि वहाँ हमने कोई निर्णय नहीं लिया तो यह एक ऐतिहासिक ग़लती होगी."

उनका कहना था, "हमें बाध्यकारी निर्णय लेने होंगे और उसके प्रति प्रतिबद्धता जतानी होगी."

विकासशील देशों की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित देशों को धरती के बढ़ते तापमान से निपटने के लिए विकासशील देशों को आर्थिक सहायता देनी होगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने विश्वास जताया कि मनमोहन सिंह कोपेनहेगन सम्मेलन में शामिल होंगे और कहा, "भारत के पास गँवाने के लिए कुछ नहीं है कोपेनहेगन में कुछ हासिल ही होना है. यदि भारत चाहता है कि उसकी बात सुनी जाए तो उसे वहाँ उपस्थित रहना पड़ेगा."

उन्होंने कहा कि भारत कभी भी कोपेनहेगन संधि के रास्ते में बाधक नहीं होगा.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही कार्बन उत्सर्जन में कटौती के अपने लक्ष्यों की घोषणा करेगा.

भारत ने न तो लक्ष्य की घोषणा के कोई संकेत दिए हैं और न यह घोषणा की गई है कि प्रधानमंत्री कोपेनहेगन सम्मेलन में जाएँगे या नहीं.

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