कोपेनहेगेन सम्मेलन की सफलता में भारत का हित : मनमोहन (राउंडअप)

पोर्ट ऑफ स्पेन, 28 नवंबर (आईएएनएस)। कोपेनहेगेन में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के शुरू होने के 10 दिन पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन से मुलाकात करके 192 देशों के सम्मेलन में "एक संतुलित, न्यायपूर्ण और महत्वाकांक्षी परिणाम" हासिल करने के प्रयासों को आगे बढ़ाया।

राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन के दौरान मनमोहन सिंह ने सरकोजी और ब्राउन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ताओं पर जोर दिया कि कोपेनहेगेन सम्मेलन की सफलता पर भारत का बड़ा दांव है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने बताया कि प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश और फ्रांसीसी नेताओं से कहा कि जलवायु परिवर्तन पर 7-18 दिसम्बर के कोपेनहेगेन सम्मेलन की सफलता भारत के हित में है।

भारत की स्थिति को स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के लिए किए गए एकतरफा और स्वैच्छिक कार्यो की जानकारी दी और जलवायु परिवर्तन के मुकाबले के लिए भारत की राष्ट्रीय कार्य योजना का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने विकसित और विकासशील देशों को कार्बन गैसों के उत्सर्जन रोकने में समान लेकिन भिन्न जिम्मेदारी देने पर बल देते हुए जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी और संसाधनों के हस्तांतरण की आवश्यकता जताई।

सिंह ने सरकोजी और ब्राउन से कहा कि केवल प्रौद्योगिकी और संसाधनों का हस्तांतरण ही जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकासशील देशों की मदद कर सकता है।

भारत ने संरक्षणवाद के खिलाफ चेतावनी दी :

कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्यों को स्वीकार करने के लिए विकसित देशों के बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को ग्रीन लेबल के तहत संरक्षणवादी नीतियों को आगे बढ़ाने के खिलाफ चेतावनी दी।

जलवायु परिवर्तन पर कोपेनहेगेन में होने जा रहे संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन से महज 10 दिन पहले प्रधानमंत्री ने एक कड़े संदेश में कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक चर्चा आर्थिक प्रतिस्पर्धा बनाए रखने या समान अवसरों के तर्को में फंस गई है।"

उन्होंने कहा, "जलवायु परिवर्तन ग्रीन लेबल के तहत संरक्षणवादी नीतियों को आगे बढ़ाने का बहाना बनता जा रहा है। यह जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) के विपरीत और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का उल्लंघन है।"

राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्षों के शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन पर एक विशेष सत्र में प्रधानमंत्री ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि भारत और अन्य विकासशील देश इसका कड़ाई से प्रतिरोध करेंगे।

सिंह ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक सामूहिक वैश्विक प्रतिक्रिया और 7-18 दिसम्बर को कोपेनहेगेन में आयोजित सम्मेलन में "महत्वाकांक्षी, ठोस और संतुलित परिमाण" हासिल होने के प्रयासों को भी आगे बढ़ाने को कहा।

उन्होंने कहा कि कोपेनहेगेन सम्मेलन के व्यापक, संतुलित और सबसे ऊपर न्यायसंगत निष्कर्ष पर भारत हमेशा जोर देता रहा है।

सरकोजी ने मनमोहन से किया आग्रह :

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कोपेनहेगेन में जलवायु परिवर्तन पर होने वाले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में शामिल होने का आग्रह किया। सिंह ने इस प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल में अपने सहयोगियों से चर्चा का आश्वासन दिया है।

राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (चोगम) के प्रेस केंद्र में सरकोजी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्होंने मनमोहन सिंह से 7-18 दिसम्बर के कोपेनहेगेन सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए विशेष आग्रह किया।

सरकोजी ने बताया कि सिंह ने उनसे कहा कि भारत लौटने के बाद वह कोपेनहेगेन सम्मेलन में हिस्सा लेने के इस प्रस्ताव के बारे में मंत्रिमंडल में चर्चा करेंगे।

सरकोजी ने कहा कि भारत के साथ परमाणु प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते को अंतिम रूप देने के लिए मार्च या अप्रैल 2010 में भारत का दौरा करने की उनकी योजना है।

कार्बन उत्सर्जन के बारे में सरकोजी ने कहा कि इसके निरीक्षण के लिए उन्होंने एक वैश्विक संस्था बनाने का प्रस्ताव रखा है।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्याओं से उबरने के लिए गरीब देशों को सहायता देने के वास्ते 10 अरब डॉलर के कोष की स्थापना के बारे में ब्रिटिश प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन से उनकी चर्चा हुई है। भारत को इससे लाभ हो सकता है।

कोपेनहेगेन वार्ता के परिणामदायक और प्रगतिशील होने की उम्मीद जताते हुए सरकोजी ने कहा, "हम चाहते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत की आवाज सुनी जाए।"

उन्होंने भरोसा जताया कि सम्मेलन की सफलता के रास्ते में भारत अवरोध नहीं बनेगा। कोपेनहेगेन सम्मेलन को ऐतिहासिक बताते हुए सरकोजी ने भरोसा जताया कि सभी चुनौतियों को पार कर लिया जाएगा।

सरकोजी ने कहा, "यदि हम कोपेनहेगेन में असफल हुए तो सब विफल हो जाएगा।"

राष्ट्रमंडल फिर से कर सकता है विश्व बिरादरी का नेतृत्व :

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने कहा है कि 53 देशों के संगठन राष्ट्रमंडल को फिर से दुनिया का नेतृत्व करने का मौका मिला है। इस बार यह संगठन जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में दुनिया का मार्गदर्शन कर सकता है।

उन्होंने यहां राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों के शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्या हमारी मुख्य चुनौती है और राष्ट्रमंडल इस मामले में दुनिया को राह दिखा सकता है। महारानी एलिजाबेथ ने कहा कि राष्ट्रमंडल को इस पर गर्व होना चाहिए कि उसने पिछले छह दशकों के अपने इतिहास में कई प्रमुख चुनौतियों से निपटने के मामले में दुनिया का मार्गदर्शन किया। इस संगठन ने इन चुनौतियों से निपटने की रणनीति का स्वरूप तय किया है।

संगठन की संवैधानिक प्रमुख एलिजाबेथ ने शुक्रवार की रात नेशनल सेंटर फॉर द परफार्मिग आर्ट्स में शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन पर कोपेनहेगन में होने वाला संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन हमें जलवायु परिवर्तन के खिलाफ मुहिम तेज करने की प्रेरणा देगा। इससे राष्ट्रमंडल को दुनिया को राह दिखाने का नया मौका मिलेगा।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिह समेत दुनिया के कई शासनाध्यक्षों की शिरकत वाले इस सम्मेलन में उन्होंने कहा कि पर्यावरण को खतरा हमारी नई चुनौती नहीं है, लेकिन अब यह पूरी दुनिया के लिए खतरनाक चुनौती बन गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षो में इससे हमारी सुरक्षा एवं स्थायित्व को खतरा पहुंचेगा। राष्ट्रमंडल देशों में ऐसे लोगों पर इसका खास असर पड़ेगा जो पहले से ही अपनी आजीविका को लेकर असुरक्षित महसूस करते रहे हैं।

उन्होंने इस मौके पर राष्ट्रमंडल की युवा ताकत को संवारने की जरूरत पर बल दिया। महारानी ने कहा कि युवाओं को यह भरोसा दिलाने की जरूरत है कि राष्ट्रमंडल उनकी आकांक्षाओं को पूरी करने की क्षमता से लैस है।

ब्रिटेन, फ्रांस ने भारत को आश्वस्त किया :

मुंबई पर आतंकवादी हमले की पहली बरसी के एक दिन बाद ब्रिटेन और फ्रांस ने 'अफगानिस्तान में बने रहने' और पाकिस्तान तथा क्षेत्र से आतंकवाद की समाप्ति के प्रयासों को दोगुना करने के अपने इरादों के प्रति भारत को आश्वस्त किया।

राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन के इतर फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अफगानिस्तान में बने रहने की आवश्यकता पर जोर दिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने बताया कि सरकोजी और ब्राउन अफगानिस्तान में अंतर्राष्ट्रीय सेना के बने रहने की आवश्यकता से सहमत थे।

प्रकाश ने कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान की स्थिति पर सभी नेताओं के दृष्टिकोण में समानता थी। वे क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रयासों को और बढ़ाने पर भी राजी थे।

सिंह के साथ चली करीब एक घंटे लंबी मुलाकात में सरकोजी ने मुंबई हमले की पहली बरसी के एक दिन बाद भारत के साथ एकजुटता दिखाते हुए हमले के दोषियों को दंड देने को कहा।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग बढ़ाने और असैन्य परमाणु सहयोग के विस्तार पर भी सहमति जताई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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