घरेलू मांग सुनिश्चित करेगा तेज विकास : मुखर्जी
ग्रामीण और औद्योगिक विकास शोध केंद्र में पी. एन. हक्सर की याद में दिए एक व्याख्यान में मुखर्जी ने कहा कि आर्थिक मंदी का एशियाई अर्थव्यवस्था तक एक सीमा तक असर पड़ा। उनमें सुधार के स्पष्ट संकेत दिखने लगे हैं।
मुखर्जी ने कहा, "मैं ईमानदारी से मानता हूं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट से उबरने लगी है और एशियाई अर्थव्यवस्था तेजी से और किसी और क्षेत्र की तुलना में मजबूती से उबरते हुए दिख रही है।"
उन्होंने कहा, "वर्तमान शताब्दी को इतिहासकार संभव: एशिया के पुनर्जागरण की शताब्दी करार देंगे।"
उन्होंने कहा कि वित्तीय विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि चीन और भारत की वर्ष 2025 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी 35 फीसदी हो जाएगी।
मुखर्जी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में वैश्विक मंदी के बावजूद अच्छे विकास के पीछे घरेलू मांग, युवा जनसंख्या और एक लोकतांत्रिक तंत्र है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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