भारतीय वैज्ञानिक ने रेडियोधर्मी कचड़ा कम करने की प्रौद्योगिकी विकसित की
भारत के कलपक्कम स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक एस. नरसिम्हन ने जर्मनी के डोर्टमंड स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरमेंटल रिसर्च टेकि्न शे यूनिवर्सिटैट के रसायनशास्त्री पी.डी बोर्जे सेलेरग्रेन के साथ मिलकर यह तकनीकी विकसित की है।
अमूमन, रेडियोधर्मी जल को आयन एक्सचेंजर से साफ किया जाता है, पर इस तकनीकी की सबसे बड़ी खामी यह है कि यह गैर रेडियोधर्मी लौह-आयन एवं रेडियोधर्मी कोबाल्ट आयन के बीच फर्क महसूस नहीं कर पाती। दोनों ने एक ऐसी सामग्री की तलाश की जो कोबाल्ट आयन को आपस में बांधने में मददगार हो। उन्होंने मॉलिक्यूलर इंप्रिंटिंग प्रक्रिया के जरिए एक विशेष पॉलीमर विकसित किया जो कोबाल्ट आयन को बांधने में मददगार है। कोबाल्ट आयन को हाइड्रोक्लोरिक एसिड के साथ बाहर निकाला जाता है, जिसका मतलब है कि रेडियोधर्मी जल से ये आयन लगभग बाहर हो गए हैं। ऐसी विधि से इस पॉलीमर की अल्प मात्रा का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर रेडियोधर्मी समस्थानिकों को अलग किया जा सकता है और रेडियोधर्मी कचड़े की मात्रा में कटौती की जा सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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