यूरोप में जलवायु परिवर्तन के लिए सघन भू प्रबंधन उत्तरदायी
एक नई अध्ययन रिपोर्ट में यह कहा गया है कि यूरोप में कार्बन का अवशोषण करने वाले वनों एवं घास मैदानों का दायरा सिमटने से इस महादेश में प्राकृतिक संसाधानों द्वारा गैसों को अवशोषित करने की क्षमता काफी कम हो गयी है। वनों, समुद्रों, घास मैदानों को प्राकृतिक कार्बन सिंक(कार्बन को अवशोषित करने वाली हौदी) कहा जाता है।
वैश्विक कार्बन डायऑक्साइड उत्सर्जन का करीब 50 फीसदी हिस्सा हवा में जमा होता है, जहां वह ग्लोबल वार्मिग को जन्म देता है, जबकि शेष कार्बन को समुद्र, जंगल, घास के मैदान, कूड़ा निपटान स्थल अवशोषित कर लेते हैं। ईयू-इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट कार्बोयूरोप नामक शोध परियोजना में सहयोग देने वाले 17 यूरोपीय देशों के शोधकर्ताओं ने यूरोप के ग्रीनहाउस गैस संतुलन का गहन अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला है।
शोधकर्ताओं ने इसकी पुष्टि की कि कभी यूरोप सालाना 30.5 करोड़ टन कार्बन को अवशोषित करने की क्षमता से लैस था, पर वनों एवं घास मैदानों के विनाश के कारण यह क्षमता 2 फीसदी के बिंदु पर सिमट गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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