शिरीन का नोबेल पदक 'ज़ब्त'

ईरान की प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी ने ईरान की सरकार पर उनका नोबेल पदक और संबंधित दस्तावेज़ ज़ब्त करने का आरोप लगाया है.
शिरीन एबादी को वर्ष 2003 में ईरान में मानवाधिकार के क्षेत्र में योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. वे पहली मुस्लिम महिला थीं जिन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
उन्होंने कुछ महीने पहले ईरान में हुए चुनावों के बारे में सरकार और प्रदर्शनकारियों के साथ हुए बर्ताव की काफ़ी आलोचना की थी. ग़ौरतलब है कि ईरान की ओर से फ़िलहाल आधिकारिक तौर पर इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
वे ईरान में जून में हुए चुनाव से एक दिन देश से बाहर चली गईं थी और आजकल लंदन में हैं. लेकिन उन्होंने कहा है कि वे उन्हें मिल रही धमकियों से घबराने वाली नहीं हैं. उनका कहना था, "जब भी मेरे देश के लिए मेरी उपयोगिता होगी, मैं वतन लौट जाऊँगी."
नॉर्वे ने आपत्ति जताई
शिरीन एबादी का कहना है कि लगभग तीन हफ़्ते पहले उनका नोबेल पदक और उससे संबंधित डिप्लोमा को तेहरान में एक बैंक लॉकर से निकाल लिया गया है.
शिरीन एबादी का कहना है कि लगभग तीन हफ़्ते पहले उनका नोबेल पदक और उससे संबंधित डिप्लोमा को तेहरान में एक बैंक लॉकर से निकाल लिया गया है.
नॉर्वे के विदेश मंत्री जोनास गाहर स्टोर ने इस क़दम का विरोध किया है. उन्होंने शिरीन एबादी के साथ हुए इस बर्ताव की बर्मा की नेता ऑंग सॉंन सू ची के साथ हो रहे बर्ताव के साथ तुलना की है.
नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह 'स्तब्ध' है क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी देश की सरकार ने इस तरह का क़दम उठाया है. नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने ईरान के कूटनीतिक अधिकारियों को भी तलब किया है. नॉर्वे ने तेहरान में शिरीन एबादी के पति की कथित पिटाई पर भी चिंता जताई है.












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