भोपाल में लेखक पर कालिख पोती और पिटाई

Madhya Pradesh
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक पुस्तक के लेखक की 'संस्कृति बचाओ मंच' के कार्यकर्ताओं ने जमकर पिटाई की और उसके शरीर पर कालिख पोत दी। यह सब कुछ हुआ पुलिस की मौजूदगी में। देश और दुनिया में 'लवगुरु' के नाम से चर्चित पटना के प्रो. मटुकनाथ और उनकी महिला मित्र जूली को भी 'संस्कृति बचाओ मंच' के विरोध का सामना करना पड़ा। ये दोनों उक्त लेखक की पुस्तक 'विवाह एक नैतिक बलात्कार' का विमोचन करने भोपाल आए थे।

ऋषि अजय दास ने 'विवाह एक नैतिक बलात्कार' शीर्षक से एक पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक का शुक्रवार को विमोचन होना तय था। विमोचन के लिए अपनी छात्रा से प्रेम प्रसंग के कारण चर्चाओं मे आए प्रो. मटुकनाथ और उनकी छात्रा मित्र जूली को बुलाया गया था।

इस पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम की जानकारी मिलने पर 'संस्कृति बचाओ मंच' के कार्यकर्ता आयोजन स्थल रवींद्र भवन पहुंच गए। पहले उन्होंने मटुकनाथ और जूली का विरोध किया फिर लेखक अजय दास को निशाना बनाया। इस मौके पर भारी पुलिस बल भी मौजूद था। इसके बावजूद मंच के कार्यकर्ताओं ने अजय दास की पिटाई की और उनके पूरे शरीर पर कालिख पोत दी। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने अजय दास को स्टोर रूम में बंद कर दिया। जब पुलिस उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जा रही थी तब भी मंच के कार्यकर्ताओं ने बदसलूकी की। अजय दास को पुलिस एक वाहन में डालकर ले गई।

मंच के संयोजक चंद्रशेखर तिवारी ने कहा है कि अजय दास द्वारा लिखी गई किताब भारतीय संस्कृति पर हमला है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नगर पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार का कहना है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

उधर, मटुकनाथ और जूली जब रवींद्र भवन पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद संस्कृति बचाओ मंच के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और उनकी ओर झपटे भी। पुलिस किसी तरह उन्हें बचाकर एक कमरे में ले गई। मटुकनाथ और जूली को काफी देर तक कमरे में बंद रखा गया।

मटुकनाथ ने इस विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विरोध करना तो विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों का पुराना धंधा है। अगर उनकी ओर से ऐसा न हो तो आश्चर्य की बात है। उन्होंने आगे कहा कि जिसे संगठन को विचार मात्र से खतरा हो और जो विचार न पनपने देना चाहता हो, जो विचारों पर कुंडली मारकर बैठ गया हो उस संगठन का नाम है विश्व हिंदू परिषद। ऐसी परिषदें ही देश के लिए खतरा है। उनके लाख प्रयास के बावजूद ऐसी किताबे छपती रहेंगीं।

इस मौके पर जूली ने कहा, "जिनका काम हंगामा करना है, वे हंगामा करें, हम तो अपनी बात कहेंगे। दूसरों को भी स्वतंत्रता है कि वे लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात कहें, हंगामा करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने किताब का विरोध करने वालों को सलाह दी कि वे पहले उसे पढ़े, पसंद न आए तो उसे न माने।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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