दुबई वर्ल्ड के डूबने के भय से प्रवासियों के परिजनों में खौफ
खाड़ी के देशों में पांच लाख भारतीय कार्यरत हैं और उनमें से सर्वाधिक दुबई में काम करते हैं। ऐसे में वहां के रोजगार बाजार के डगमगाने से प्रवासियों के भारत में रह रहे परिजनों की आय पर बुरा असर पड़ना स्वभाविक है।
प्रमुख रोजगार प्रदाता एजेंसी 'मा फोई मैनेजमेंट कंसल्टेंन' के प्रमुख ई. बालाजी ने आईएएनएस को बताया कि मध्य-पूर्व में पिछले एक साल से हालात गड़बड़ाने लगे हैं और इस वजह से वहां काम कर रहे प्रवासी लौटने लगे हैं। वहां के रोजगार बाजार में 25 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। दुबई वर्ल्ड के डगमगाने का असर मध्य-पूर्व के दूसरे देशों पर भी पड़ने लगा है।
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाई. वी. रेड्डी ने भी खाड़ी देशों में भारतीयों के नौकरी छूटने की आशंका पर चिंता जताते हुए कहा है कि काफी कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि इसका वहां की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर क्या असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि संपत्तियों की कीमतों और शेयर बाजार में गिरावट एक बात है, यह एक खास वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है। मगर देखना यह है कि वहां के जीवन और वास्तविक आर्थिक गतिविधियों पर इसका कैसा असर पड़ता है.
कोट्टायम के चंगानाचेरी में रहने वाले एक अवकाशप्राप्त सरकारी कर्मचारी केटी थामस बताते हैं कि हालांकि उनका बेटा दुबई में काम नहीं करता, वह शारजाह में है, मगर वहां के हालात भी काफी अच्छे नहीं हैं, वह भी अपनी नौकरी को लेकर परेशान रहता है।
उन्होंने मकान बनवाने के लिए ऋण ले रखा है। अगर उनके बेटे की नौकरी चली गई और वह वहां से कुछ भेजने में सक्षम नहीं रहा तो अपने पेंशन के थोड़े से पैसों से इस कर्ज को चुका पाना उनके लिए मुमकिन नहीं होगा।
आंध्र प्रदेश में जहां केरल के बाद खाड़ी देशों से सबसे अधिक पैसा आता है वहां की रियल एस्टेट उद्योग मानता है कि दुबई वर्ल्ड के मसले के संभलने के बजाय बिगड़ने की ही अधिक संभावना है।
हैदराबाद में छुट्टियों में आए एएम इमरान कहते हैं कि जब दिसंबर और जनवरी में कंपनियों के वित्तीय नतीजे आएंगे तो हालात और बुरे हो जाएंगे, कई हजार लोगों की नौकरियां छूट जाएंगी। हालांकि विशेषज्ञ बताते हैं कि इन सबका दुबई वर्ल्ड के भारत में भविष्य की योजनाओं पर तो असर पड़ेगा, मगर मौजूदा परियोजनाओं पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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