आकर्षक दिखने के लिए बच्चियों में मोटापे से भय
तीन से छह साल की लड़कियों के बीच कराए गए एक अध्ययन से पता चला है कि ये बच्चियां मोटी होने से तो परहेज करती हैं, मगर इनके मन में सुंदर और आकर्षक दिखने की कोई चाहत नहीं होती।
अध्ययन से मीडिया द्वारा प्रचारित वह धारणा गलत साबित हो गई है जिसके मुताबिक यह कहा जा रहा था कि ज्यादा समय टीवी देखने में गुजारने के कारण छोटी बच्चियां भी कम उम्र में ही सुंदरता के प्रति सजग हो गई हैं और इसी वजह से वे दुबली दिखना चाहती हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल फ्लोरिडा में प्रोफेसर स्टासे टेंटलेफ-डन और डाक्टरेट के छात्र शेरान हायस ने इस विषय पर तीन से छह वर्ष की 121 लड़कियों के साथ यह अध्ययन किया। अध्ययन के मुताबिक इनमें से आधी लड़कियां मोटी होने के नाम से घबराती थीं. मगर जब उन्हें दुबली-पतली और खूबसूरत राजकुमारियों की एनिमेटेड वीडियो क्लिपिंग दिखाई गई तो इससे उनके आत्म विश्वास पर कोई फर्क नहीं पड़ा, जबकि इसी विषय पर पहले युवतियों के बीच कराये गए अध्ययन से पता चला था कि सुंदर और दुबली मॉडल्स की वीडियो क्लिपिंग देखकर उनका आत्म विश्वास डगमगाने लगा था। इन अध्ययनों से यह पता चला कि बड़ी उम्र की लड़कियां ही खूबसूरत और आकर्षक दिखने के चक्कर में डाइटिंग करती हैं, छोटी बच्चियों पर यह नियम लागू नहीं होता।
अध्ययन के दौरान उन 121 बच्चियों को एक कमरे में एक प्रशिक्षित अध्येता, एक बीस साल की युवती के साथ छोड़ दिया गया था। कुछ देर बात करने के बाद उस युवती ने जब बच्चियों से पूछा कि वे अपने रूप-रंग और शरीर के बारे में क्या सोचती हैं, तो उनमें 21 फीसदी बच्चियों ने बताया कि वह मोटी होने से डरती हैं, जबकि अन्य 18 फीसदी बच्चियों का कहना था कि इस बारे में भी वह कभी-कभी सोचती हैं।
गौरतलब है कि मीडिया में इस तथ्य के आने के बाद कि टीवी और फिल्में देखने के कारण छोटी बच्चियां भी 'ब्यूटी कान्सस' (खूबसूरती के प्रति सजग) हो गई हैं, अमेरिकी अभिभावक अपनी बच्चियों को 'द प्रिंसेस एंड द डॉग' नामक फिल्में दिखाने लगे थे। इस फिल्म में बताया गया है कि पतली कमर और सिंडरेला की तरह के सुनहरे बाल जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण नहीं हैं। यह अध्ययन 'ब्रिटिश जरनल ऑफ डेवलॉपमेंटल साइकॉलॉजी' में प्रकाशित हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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