दुबई वर्ल्ड संकट का भारत पर आंशिक असर : नीति निर्माता (लीड-2)
शुक्रवार को वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा, "देश की अर्थव्यवस्था काफी बड़ी है। यह एक लचीली अर्थव्यवस्था है। मुझे नहीं लगता कि दुबई के रियल एस्टेट कारोबार में हुए किसी घटनाक्रम का भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई असर पड़ेगा।"
शर्मा ने कहा, "जहां तक भारत का प्रश्न है, आवास, रियल एस्टेट क्षेत्र और निर्माण उद्योग बेहतर काम कर रहे हैं। इसकी पुष्टि निर्माण सामग्री, सीमेंट और इस्पात की बढ़ती मांग से होती है।"
दूसरी ओर वित्त सचिव अशोक चावला की राय इस बारे में थोड़ी अलग है। वह इस बारे में कोई भी टिप्पणी करने से पहले हालात का अध्ययन करना चाहते हैं।
चावला का कहना है, "हमें अध्ययन करना होगा कि यह क्या मसला है, यह क्या समस्या है। हमारे देश की अर्थव्यवस्था, जनता और कारोबारों पर इसका क्या असर हो सकता है।"
यह पूछने पर कि क्या इस संकट का असर देश में आने वाली पूंजी पर पड़ेगा, चावला ने कहा कि इसकी संभावना नहीं है। दरअसल, प्रति वर्ष प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले करीब 25 अरब डॉलर के धन में से आधा खाड़ी के देशों से आता है।
दुबई वर्ल्ड ने उस समय दुनिया को स्तब्ध कर दिया जब उसने गुरुवार को घोषणा की कि उसे करीब 59 अरब डॉलर के खर्च को चुकाने के लिए कर्जदाताओं से छह माह का अतिरिक्त समय चाहिए।
इस ईकाई के तहत कई कंपनियां हैं जिनका हित रियल्टी, आधारभूत संरचना, रसद और आर्थिक जोन से जुड़ा हुआ है।
दुबई वर्ल्ड की इस घोषणा पर दुनिया के शेयर बाजारों ने प्रतिकूल प्रतिक्रिया दी है। देश के प्रमुख शेयर बाजार बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स इस खबर के बाद 634.16 अंकों तक लुढ़क गया जो बाद में 223 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ।
शेयर ब्रोकरेज कंपनी एसएमसी कैपिटल के जगन्नाथम थुनुगुंटला ने कहा, "एक साल पहले के निम्न स्तर से देश के शेयर बाजारों में 100 फीसदी से अधिक का उछाल आया है। ऐसा अर्थव्यवस्था में सुधार की खबरों के कारण हुआ।"
उन्होंने कहा, "इस खबर का देश के शेयर बाजारों पर नकारात्मक असर पड़ेगा और सूचकांक में गिरावट आएगी।"
भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर वाई. वी. रेड्डी ने खाड़ी देशों में नौकरी कर रहे भारतीय कामगारों के भविष्य पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि संकट का वहां की वास्तविक अर्थव्यवस्था और रोजगार पर पड़ने वाले असर से काफी कुछ तय होगा।
रेड्डी ने कहा, "अगर संपत्ति या शेयर की कीमतों में कमी आई, तो यह अलग बात है। इसका असर सिर्फ एक वर्ग के लोगों पर पड़ेगा। लेकिन उन देशों के जीवन स्तर, रोजगार के हालात, आर्थिक गतिविधियों पर इसका असर किस तरह पड़ेगा, यह देखना होगा।"
चावला का कहना है कि नौकरियों और वेतन पर इसका असर पड़ने की संभावना नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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