चीन-पाक के सैन्य संबंध चिंता का विषय : एंटनी (लीड-1)

रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (आईडीएसए) के 44 वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह को यहां संबोधित करते हुए एंटनी ने उम्मीद जताई कि चीन सरकार लंबित मसलों के समाधान के लिए भारत के प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख अपनाएगी। उन्होंने कहा कि भारत, पाकिस्तान और चीन सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है।

एंटनी ने कहा, "हमें उम्मीद है कि चीन सरकार परस्पर विश्वास और समझ कायम करने की दिशा में की गई भारत की पहल का उचित जवाब देगी।"

चीन ने हाल में पाकिस्तान को 36 जे-10 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करने का करार किया है। पाकिस्तान और चीन ने तीसरी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने के लिए भी एक-दूसरे से हाथ मिलाया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत, पाकिस्तान और चीन सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है। ऊर्जावान लोकतंत्र और समृद्धि की राह पर अग्रसर अर्थव्यवस्था वाला देश होने के बावजूद भारत अपनी सुरक्षा की अनदेखी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पाकिस्तान के साथ बातचीत की इच्छा को इसी रूप में देखा जाना चाहिए। पाकिस्तान के मसले पर रक्षा मंत्री ने कहा कि उनकी धरती पर आतंकवाद का ढांचा यथावत है।

दूर की जाएंगी अग्नि-द्वितीय की खामियां :

रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने परमाणु क्षमता से युक्त मध्यम दूरी तक मार करने वाली अग्नि-2 मिसाइल का हाल ही में परीक्षण विफल होने को कम करके आंकते हुए शुक्रवार को कहा कि वैज्ञानिक बहुत जल्द इसकी खामियां सुधार देंगे।

एंटनी से जब पूछा गया कि यह विफलता देश के एकीकृत निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम के लिए आघात है तो उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह सही नहीं है। कई बार परीक्षण विफल हो जाते हैं।" उन्होंने कहा, "मुझे पक्का यकीन है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ)के वैज्ञानिक इस समस्या को देखेंगे और दूर कर देंगे।"

गत 23 नवंबर को हुआ अग्नि-2 का प्रथम रात्रि परीक्षण विफल हो गया था। सतह से सतह पर मार करने वाली इस मिसाइल को उड़ीसा के व्हीलर द्वीप से प्रक्षेपित किया गया था। इससे पहले इसी साल के आरंभ में अग्नि-2 का दिन के समय हुआ परीक्षण भी विफल रहा था।

प्रधानमंत्री के रूस दौरे पर गोर्शकोव सौदा नहीं :

रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अगले महीने रूस दौरे के दौरान विमान वाहक पोत एडमिरल गोर्शकोव की खरीद के लिए संशोधित सौदा होने की संभावना नहीं है।

रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (आईडीएसए) के 44 वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह के अवसर पर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान जब एंटनी से पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान इस पोत के लिए संशोधित सौदे पर हस्ताक्षर हो सकते हैं तो उन्होंने आईएएनएस से कहा, "नहीं, ऐसा नहीं है। "

इस बीच नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पोत का नवीकरण करने के लिए अंतिम कीमत तय करने की दिशा में सकारात्मक विकास हुआ है। विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्शकोव भारतीय नौसेना में आईएनएस विक्रमादित्य के नाम से शामिल किया जाएगा।

अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा कि इस दिशा में सकारात्मक विकास हुआ है और रूसी अधिकारियों ने कीमतों को तर्कसंगत करने और कीमत और न बढ़ाने पर सहमति जताई है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले पोत की कीमतों में की गई वृद्धि पर चर्चा करने के लिए रूसी अधिकारियों का 40 सदस्यीय दल नई दिल्ली आया था।

रूस इस पोत की कीमत 2.9 अरब डॉलर मांग रहा है जबकि भारत इसके लिए 2.1 अरब डॉलर देने को तैयार है। इससे पहले इसकी कीमत 1.5 अरब डॉलर तय हुई थी जिस पर दोनों पक्षों की सहमति थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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