26/11: आज भी हरे हैं पीड़ित परिवारों के जख्म
हैदराबाद, 26 नवंबर (आईएएनएस)। मुबई में हुए आतंकवादी हमलों को भले ही साल बीत गया हो, लेकिन आंध्र प्रदेश के तीन परिवारों के जख्म आज भी हरे हैं। अपनों को खोने का सदमा इन लोगों की जिंदगी का हिस्सा सा बन चुका है।
मुंबई के ताज होटल में आतंकवादियों की गोलियों का निशाना बने विजय राव बंजा का परिवार आज भी उस सदमें से उबर नहीं पाया है। 48 वर्षीय विजय ताज होटल में शैफ के रूप में कार्यरत थे।
यहां नेरेदमेत में स्थित विजय के घर में आज भी सन्नाटा है। उनकी पत्नी फरीदा तो पति के जाने का गम सह भी नहीं सकी थीं। विजय की मौत के एक महीने बाद ही फरीदा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उनका एक 18 साल का बेटा भी है।
हैदराबाद के लक्ष्मी नारायण गोयल के लिए बीते साल मुंबई का सफर आखिरी सफर साबित हुआ। विले पार्ले में एक टैक्सी में हुए विस्फोट में गोयल की मौत हो गई थी।
उस दिन 55 वर्षीय गोयल हैदराबाद आने की तैयारी में थे लेकिन मौत ने उन्हें अपनी ओर खींच लिया। रेलगाड़ी छूट जाने के बाद वह अपने एक संबंधी के घर लौट रहे थे कि विस्फोट हो गया जिसमें उनकी मौत हुई।
हैदराबाद की नूरजहां बेगम को भी 26 नवंबर, 2008 की तारीख कभी ना भरने वाला जख्म दे गई। हमले में उनकी बेटी अमीना बेगम की मौत हो गई थी और पति अब्दुल रशीद घायल हो गए थे।
नूरजहां का परिवार मुंबई हाजी अली की दरगाह पर गया था। उनके पति आज विकलांग हो चुके हैं। वह कहती हैं, "हमारी जीविका के एक मात्र जरिया मेरे पति थे। अब वह घर से बाहर नहीं जा सकते।" वह इस बात से नाराज हैं कि तमाम वादों के बावजूद उन्हें कोई सहायता नहीं दी गई।
गौरतलब है कि मुंबई के कई महत्वपूर्ण स्थानों पर हुए हमले में करीब 170 लोग मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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